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 59वें ग्रैमी अवॉर्ड्स से सम्मानित संदीप दास भारतीय मीडिया से शिकायत है। उनका कहना है कि मीडिया को फिल्मों से और क्रिकेट से फ़ुरसत नहीं है। भारतीय मीडिया को अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी ताकि लोगों का ध्यान संगीत, कला और संस्कृति पर जाए।

उन्होंने कहा कि अब जब मुझे ग्रैमी मिला है तो फ़ोन बजने शुरू हैं। कहाँ था भारत का मीडिया अब तक ? मुझे सालों की मेहनत के बाद ग्रैमी मिला है।

वे कहते हैं, ‘लानत है कि जब बाहर से ठप्पा मिला तो मीडिया और लोग ध्यान देते हैं। नहीं तो हमारी मीडिया को फिल्मों से और क्रिकेट से फ़ुरसत नही। बाहर देश के अख़बारों में दो पन्ने आर्ट और संस्कृति पर हैं, यहां पर नहीं।

बात करते हुए संदीप ने कहा, ‘हम लकीर के फ़कीर हैं, हमें सिर्फ़ डॉक्टर इंजीनियर बनना है। पहले तो खेल की तरफ़ भी लोग ध्यान नहीं देते थे क्योंकि लोगों को डर था कि पैसा नहीं मिलेगा। क्रिकेट में बेशक अभी हाल ठीक है लेकिन दूसरे खेल में हाल देखिए, हम ओलंपिक में इतने सालों बाद भी इस बार दो ही मेडल ला पाए।’

संदीप बताते हैं कि भारत के बाहर जो बड़े कॉलेज हैं तो वहाँ पढ़ाई के सिवा कविता, खेल और आर्ट्स से जुड़ा कोई हुनर भी होता है। हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी।

संदीप कहते हैं, ‘पिताजी की वजह से तबले से परिचय हुआ। हम हिन्दुस्तानी सिर्फ़ पढ़ाई पर ध्यान देते हैं लेकिन आर्ट्स, खेल, म्यूज़िक के लिए हम लोग बिल्कुल गंभीर नहीं। हम लोग बस आईआईटी और आईआईएम के बारे में सोचते हैं। मगर हुनर को पनपने नहीं देते। मैं जो कुछ भी हूँ, अपने परिवार की वजह से हूं। हम मध्य वर्ग परिवार से थे फिर भी कभी इस चीज़ को मेरे शौक के आड़े नहीं आने दिया।’

मालूम हो कि पिछले दिनों भारतीय तबला वादक संदीप दास को 59वें ग्रैमी अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया है। उनको सिल्क रोड एन्सेंबल समूह के साथ बेस्ट ग्लोबल म्यूज़िक के लिए ग्रैमी अवॉर्ड दिया गया।