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स्पेन में भारतीय संस्कृति की धरोहर

प्रकाशन :शुक्रवार, 4 नवम्बर 2011
प्रो. विजयकुमारन

भारत स्पेन के बीच का राजनैयिक संबंध सन् 1956 से शुरू हुआ जब स्पेनी दूतावास की स्थापना नई दिल्ली में हुई। फिर लंदन के राजदूत को स्पेन के लिए सन् 1958 में प्राधिकृत किया गया। स्पेन की राजधानी माद्रिद में भारत के पहले रिहाइशी राजदूत, सन् 1965 में, नियुक्त हुए।  स्पेनी प्रधान मंत्री फेलिपे गोनज़ाले का भारत दर्शन सन् 1993 में और स्पेनी राजा फेलिपे का आगमन फरवरी 2001 में हुआ। 3 जुलाई 2006 को स्पेनी प्रधान मंत्री ज़पातेरो का, देश के विदेश मंत्री और 60 सदसीय उद्योग-प्रतिनिधि मंडल के साथ, भारत आना हुआ, जो भारत-स्पेनी द्विराष्ट्रीय विकास योजनाओं की पचासवीं वर्षगांठ का अनुस्मरण भी था। भारतीय प्रधान मंत्री राजीव गांधी की स्पेनी यात्रा सन् 1988 में, नरसिंह राव की सन् 1992 में, और भारतीय राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवराय पटील का स्पेन और पोलैंड राज्यों का पदार्पण अप्रले 20, 2009 से 6 दिनों के लिए हुआ। एशिायाई विकास बैंक के गवर्नरों के माद्रिद सम्मेलन में, मई 3-5 सन् 2008, को भारतीय वित्त मंत्री चिदंबरम की उपस्थिति हुई। भारत के अन्य विशोष मेहमानों जैसे, श्रीमती रेणुका चौधरी (पर्यटन राज्य मंत्री), श्री विलासराव मुट्टेंवार (राज्य मंत्री -अपारंपरित ऊर्जा स्रोत), श्रीमती शीला दीक्षित (दिल्ली मुख्यमंत्री), श्री भूपेन्दर सिंह हूदा (हरियाणा मुख्यमंत्री), श्री शुभाकांत सहाय (राज्य भक्ष्यमंत्री), श्री आनंद शर्मा (राज्य विदेश मंत्री), श्री कपिल सिबल (विज्ञान-प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री), कुमारी सेयिजा (आवास एवं नगरी गरीबी उन्मूलन राज्य मंत्री), डॉ. अंबुमणि रामदास (आरोग्य एवं गृहकल्याण मंत्री), श्री मुरली देवरा (पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री), श्रीमती अंबिका सोणी (संस्कृति और पर्यटन मंत्री), श्री लाल कृष्ण अद्वानी (गृह मंत्री), श्री जसवंत सिंह (विदेश मंत्री), श्री मुरासोलि मारन (व्यवसाय और वाणिज्य मंत्री), श्री रहमान खान (राज्य सभा उपाध्यक्ष), गुजरात अहमदाबाद के महापौर आदि की उपस्थिति भी राजनैयिक विषयों  में मार्के की रही।  स्पेनी पर्यटन एवं वाणिज्य मंत्री मिखेल सेबास्टन, माद्रिद स्यायत्तशाशी नगर के प्रधान श्री एसपेरनज़ा अगुयिरे, बारसलोना के महापौर, वयदोलिद के महापौर आदि महानुभावों का भारत पर्यटन सांस्कृतिक-व्यापारिक एवं वाणिज्य क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका अदा कर चुका है। भारत-स्पेनी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने में ये सब मीलपत्थर रह चुके हैं।

भारतीय राजदूतावास के  सांस्कृतिक तथा अन्य कार्यक्रम

व्यापार और वाणिज्य विषयक कई द्विराष्ट्री विनिमय कार्यक्रम माद्रिद के भारतीय राजदूतावास के द्वारा समय समय पर होते रहे हैं। सांस्कृतिक विनिमय के कार्यक्रमों में भारत के स्पेनी छात्रों को स्पेन के दर्शन एवं पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति दिलाने की योजना बनी, जो स्पेन की अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता एजैंसी के द्वारा चलती आ रही है। वैसे ही भारत सरकार की, हिन्दी अध्ययन की छात्रवृत्ति भी राजदूतावास के द्वारा दिलायी जाती है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के विनिमय कार्यक्रमों में स्पेन में  साहित्य कला संबंधी अनेकों कार्यक्रम एतद्विषयक विशोषज्ञों के भारत से स्पेन भेजे जाने से संपन्न हुआ करते थे। कभी व्याख्यानमाला के अंतर्गत विशोषज्ञों को भेजा जाता, तो कभी प्रतिनियुक्ति पर।

भारत स्पेनी सांस्कृतिक धरोहरों में उल्लेखनीय दो संस्थायें -'कासा आसिया' (एशिायाई भवन), जिसके दो केन्द्र बारसलोना और माद्रिद में तथा 'कासा द ल इंदिया' (भारत भवन), वल्लदोलिद में हैं, जो स्थापना काल से अध्यावधि सांस्कृतिक समन्वयन कार्यक्रम चलाती आ रही हैं। स्पेन के गलीसिया, बास्क प्रदेश, कानरी एवं बालरिक द्वीप आदि प्रांत तथा महानगरों जैसे मूरसिया, अलिकांते, वालन्सिया, माद्रिद, ज़रगोज़ा, वल्लदोलिद, सलमांका, सेविल्या, आदि में आयोजित भारतीय प्रदर्शिानियां, नृत्य, संगीत, संगोष्ठियां, भाषण जैसे बहुविध कार्यक्रम स्पेनी जनता की, भारत के प्रति अभिरुचि बढ़ाते आये हैं।

वल्लदोलिद विश्वविद्यालय

स्पेन की राजधानी माद्रिद से उत्तर की तरफ 193 कि.मी. दूरी पर स्थित स्पेन के साढ़े छ सौ वर्ष पुराने वल्लदोलिद विश्वविद्यालय में हिन्दी पढ़ाने के लिए एक अतिथि आचार्य की प्रतिनियुक्ति सन् 2004 से शुरू हुई। कला प्रदर्शिानियाँ, फोटोग्राफी, चित्रकला, लोककला, रंगकला जैसे भारत के शास्त्रीय नृत्य से लेकर लोकनृत्त तक, के सभी कार्यक्रम विनिमय कार्यक्रम के अंतर्गत हैं। 'कासा इंदिया' के प्रारंभिक कार्यक्रमों का मंच वल्लदोलिद विश्वविद्यालय ही हुआ करता था। अब विशोष कार्यक्रमों के लिए भी यह चुना जाता है, जिसके लिए खास विभाग भी इस विश्वविद्यालय में है - एशिायाई अध्ययन केन्द्र।

विश्वविद्यालय के अन्य पाठ्यक्रम

तीव्र अध्ययन पाठ्यक्रम के तौर पर वल्लदोलिद विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक कक्षायें होती थीं, जैसे कन्नड़ शस्त्रीय संगीत अध्यापन (मई 2003), वाद्या यंत्र मृदंग, बांसुरी, संगीत, अभिनय आदि का अध्यापन जो यथाक्रम 17-21 अक्तूबर 2005, 21-23 अक्तूबर 2005, 4-8 दिसंबर 2006 तथा 4-8 दिसंबर 2006 के लघुसत्रों में बंटा था। कथक नृत्य की प्रारंभिक पाठ्यपद्धति स्पेनी अध्यापिका फ्लोरन्सिया पिवेल से अक्तूबर-दिसंबर 2005 से शुरू की गयी जिसका अगला चरण 20-14 जनवरी 2008 को था। भरतनाट्यम (फरवरी-जून 2005, और फरवरी-जून 2006) पर 5 मासी सत्र मोनिका द ला फुयंते के द्वारा चलाया। इसी को आगे बढ़ाते हुए 22 नवंबर 2008 से 20 जून 2009 तक अगला सत्र चलाया गया। रमा वैद्यनाथन ने भरत नाट्य पर एक और तीव्र अध्ययन कार्यक्रम 21-22 अक्तूबर 2007 को चलाया। बोलिवुड़ और भांगड़ा नृत्याध्यापन सण्णी सिंह ने 20 दिसंबर 2008 से 21 फरवरी 2009 तक किया।

भारतीय भवन, वल्लदोलिद में कई कार्यशालायें अल्पावधी में चलायी जाती थीं। सितारवादन, सामरिक कला -केरलीय कलरी और मणिपुरी, रंगलेप, कथकली, कथक, ओडीसी, योगचर्या आदि इस प्रकार हुआ करती थीं।

कासा आसिया (एशिायाई भवन)

पहले पहल कासाआसिया या एशिायाई भवन का कार्यक्षेत्र उत्तर पूर्वी स्पेन के बारसलोना महानगर केन्द्रित रहा, तो बाद में स्पेन की राजधानी माद्रिद में भी एक शाखा खोली गयी। भले ही उक्त एशिायाई केन्द्र जपान, चीनी, वियतनामी तथा अन्य एशिायाई राज्यों की संस्कृति का भी प्रतिनिधित्व करता रहा, पर मुख्यतः वह भारत की बहुरंगी संस्कृति को ही प्रश्रय देने लगा था। शुरुआती दौर में सन् 2002 मार्च में रहस्यवादी हिन्दू संतों पर अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी लगायी और वल्लदोलिद विश्वविद्यालय में अपने शौक्षिक कार्यक्रमों के अंतर्गत 20 अक्तूबर 2002 को तीसरा भारत-वल्लदोलिद दिवस मनाया। मार्च 2004 को वल्लदोलिद के भारत भवन के संयुक्त तत्वावधान में भारत के विश्वप्रसिद्ध छायाचित्रकार रघुराय की छायाचित्र-प्रदर्शिानी लगायी। जनवरी 2005 में महीने भर के लिए -वारली के पैÏन्टग पर आधारित फोटोग्राफी-प्रदर्शिानी चलायी जो भारतीय आदिवासी जीवन केन्द्रित थी। 2005 मार्च को प्रसिद्ध शिाल्पी अनिश कपूर की कला सौन्दर्यशास्त्रविषयक प्रदर्शिानी हुई, जिसमें नैपाल के कलासंगठन का भी साथ था।

एशिायाई अंतराष्ट्र्रीय फिल्म समारोह का प्रदर्शन 'सिने आसियाटिको ' के नाम पर अक्तूबर 2005 में लगा। साथ साथ एक और फोटोप्रदर्शिानी ''अगला स्टेशन कलकत्ता - ज़िन्दगी रेलवेस्टेशनों में'' भारत के रेलवेस्टेशनों के इर्द-गिर्द जीनेवाले सैकड़ों बालक-वृद्धों के जीवन को सत्यापित करनेलायक थी। बारसलोना महानगर में अक्तूबर 8, 2005 को नवरात्रि महोत्सव भी कासा एशिाया के अधीन मनाया गया।

सन् 2007 में भारतीय स्त्रीवाद पर अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी. भारतीय क्लासिक नृत्य भरतनाट्यम आदि भी चलाये। जनवरी सन् 2010 में भारत प्रायद्वीप के शास्त्रीय संगीत पर आधारित -रागदरबारी- कार्यक्रम चलाया।

बारसलोना की भाषण श्रृंखला में स्पेनी भाषी ओस्कार पुखोल का भारत के पवित्रनगर काशी पर वक्तव्य 19 जनवरी 2005 को हुआ। तदनंतर अगस्तिन पणिक्कर का भाषण 'भारतीय धर्म और समाज में' - जातिवाद पर आधारित था। अजंता के भित्तिचित्रों पर आधारित- बौद्धप्रतिमाओं का 'द्यद्धत्द्रथ्ड्ढ द्रदृड्डड्ढद्ध' (त्रिविध शक्ति) विषयक भाषण 18 मई सन् 2005 को हुआ। 'भारतीय रहस्यवादी संतों' पर एक परिचर्चा शांतिलाल सोमय्या, के.जे. सोमय्या, ओस्कार पुखोल, और के.जे. सोमय्या भारतीय सांस्कृतिक पीठम की निदेशिाका के पीठ ने सन् 2006 जुलाई को चलायी।

भारतीय फिल्मोत्सव में, माद्रिद में प्रसिद्ध भारतीय फिल्म निर्देशक शयाम बेनगल, विश्वनाथन आदि की उपस्थिति में -'भारतीय सिनेमाओं का स्पेन में तथा स्पेनी सिनेमाओं का भारत में डिफ्यूशन ' -विषयक गोष्ठी भी मई 2005 में संपन्न हुई। उत्सव के दौरान पचासवीं और साठवीं दशक के भारतीय फिल्मी संगीतकार शंकर और जयकिशन पर श्रद्धांजली भी अर्पित की गई। अधिकांश भारतीय कलाकार को स्पेन के साथ यूरोप के अन्य राज्यों में भी अपना चातुर्य दिखाने का अवसर मिल जाता था। 'इमाजिन इंदिया' के कार्यक्रम के अंतर्गत 2008 मई से जून तक स्पेन में भारत उत्सव मनाया गया। वैसे ही फिल्म सप्ताह के अंतर्गत भारतीय सिनेमाओं का प्रदर्शन माद्रिद, बारसलोना, वल्लदोलिद और कनरी द्वीपसमूहों में हुआ करता था।

कासा द ल इंदिया (भारतीय भवन)

कासा इंदिया की स्थापना 17 मार्च 2003 में वल्लदोलिद शहर में नगरपालिका, वल्लदोलिद विश्वविद्यालय, और भारतीय राजदूतावास, माद्रिद के संयुक्त संरक्षण में हुई। कासा इंदिया का नया भवन 11 नवंबर 2006 को राज्य मंत्री आनंद शर्मा के द्वारा खोला गया और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के द्वारा टैगोर की अर्धकायप्रतिमा तथा अन्य भारतीय कला संस्कृति संबंधी वस्तुएँ भी कासा इंदिया को भेंट रूप में भारत से मिलने लगीं। नगरपालिका ने इस भवन की बगलवाली गली का नामकरण 'इंदिया मार्ग' या -काल्ये इंदिया- रखा। कासा इंदिया का निदेशक गियर्मो रोद्रिगज़ मार्टिन है, जो स्पेनी होते हुए भी भारत में 7 साल अनुसंधान पूरा करने के उपरांत भी बार बार भारत यात्रा और सांस्कृतिक आदान प्रदान के लिए कमर कस चुका है।

भारतीय संगीत नाटक अकादमी के द्वारा मार्च 2003 में भारतीय वाद्य संगीत यंत्रों की प्रदर्शिानी सांता क्रूस राजमहल में कासा इंदिया का पहला सामूहिक आयोजन रहा। भास्कर चंदवारकर और जोय बिस्वास का सितारवादन-संगीतसमारोह यथाक्रम अप्रेल और अक्तूबर 2003 में वल्लदोलिद विश्वविद्यालय में हुआ और पंडित रामनारायण का कार्यक्रम जून 2003 में हुआ।

गिरीश कर्नाड, शयाम बनगल, भास्कर चंदवरकर, गोविन्द निहलानी, जी.एस. राजन, और रवि प्रसाद आदि कलाविशारदों की, कासा इंदिया में उपस्थिति जून 2003 से अप्रेल 2006 के बीच हुई। नेहरू सेंटर, लंदन के अध्यक्ष गिरीश कर्नाड ने जून 2003 में भारतीय सिनेमा पर विश्वविद्यालय में वक्तव्य दिया। 21 अप्रेल 2005 को नेहरू सेंटर के अध्यक्ष पवन के. वर्मा ने विश्वविद्यालय में 'इक्कीसवीं सदी क्यों भारत की हो? ' विषय पर अपना वक्तव्य दिया। साथ साथ उन्होंने -'कैसे हो स्त्री से प्यार ? - 'कामशास्त्र' पर आधारित व्याख्यान दिया।

'आयुर्वेद सिद्धांत और प्रयोग', 'भरतनाट्यम -पवित्र मंदिर अनुष्ठान और नाट्य कला के बीच', 'साहित्य परिदृष्टि- पाशचात्य साहित्यकारों का भारत विषयक चिन्तन', 'समकालीन भारतीय अंग्रेज़ी उपन्यास', 'जीव विज्ञान-आयुर्वेद', आदि पर विश्वविद्यालय में अनंतर व्याख्यान हुए। भारत की ''ज्ञानानुष्ठान व्याख्यानमाला'' के अंतर्गत 'देवियाँ और गुलाम - भारतीय स्त्रियों के सामाजिक एवं प्रतीकात्मक कारोबार', 'बुद्धवाद का नृविज्ञान', 'सिख धर्म', 'वास्तुशास्त्र - प्राचीन भारत का वास्तुविज्ञान', 'तेय्यम -केरलीय मिथक और अनुश्रुति', आदि व्याख्यान मार्के के थे। ''भारत सहकारिता और सहानुभूति'' व्याख्यानमाला के अंतर्गत 'इक्कीसवीं शताब्दी में गांधी ', विसन्ते फेरर संस्था के व्याख्यान एवं प्रदर्शिानी, स्पेनी प्रसाद संस्था की प्रस्तुति एवं प्रदर्शिानी आदि शामिल थे। ''कला और साहित्य में प्रवृत्त भारतीय बिंब'' के अंतर्गत 'स्पेनी रंगमंच में प्रवृत्त भारत', 'भारतीय मिथकों की प्रतिमा-विज्ञान', 'मध्यकालीन स्पेनी कला में भारत और पूरब देशों का प्रभाव', 'अंग्रेज़ी उपनिवेशी लेखक और भारतीय संस्कृति' आदि गंभीर विषयों में आलेखवाचन हुआ। अन्य वक्तावों में प्रमुख थे- श्री पीतांबर मिश्रा, श्रीमती मीना रामन, श्री पेद्रो करेरो एरस, श्री मोहन रमनन, श्री विक्रम सेथ, श्रीमती चंदल मल्लियार्द, श्री विशाल कृष्ण, श्री खुआन अर्नव, अगस्तिन पणिक्कर, श्री खुआन कार्लोस रामचन्द्रन, श्री सी.पी.वी. विजयकुमारन, श्री पन नलिन, श्रीमती ब्लांका गार्सिया वेगा, रूबन कोंपोस पलारिया, खोरदी फोलगादो फेरेर, रोद्रिगो एस्पिनल, दावीद मेनदेज़ आदि। भारतीय एवं यूरोपी विद्वानों के ये वक्तव्य प्रारंभ से अब तक कासा इंदिया के बौद्धिक कार्यक्रमों में शामिल रहा, जिनमें वल्लदोलिद विश्वविद्यालय के मेधावी छात्र, अध्यापक और स्थानीय लोग सक्रिय सहयोग देते रहे। पुर्तगल के बारगनका और ज़मोरा में आयोजित ''संस्कृतियों का संगम- शांति की राह पर'' विषयक अंतर्राष्ट्रीय गोष्ठी में कासा इंदिया के निदेशक का वक्तव्य तथा पेन क्लब, गलीसिया में आयोजित ''द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय साहित्य समारोह'' में 'भारतीय रहस्यवादी भक्तिसाहित्य' पर श्री गियर्मो रोद्रिगज़ का, तथा 'मलयालम और हिन्दी की समकालीन भारतीय कविता' पर श्री विजयकुमारन. सी.पी.वी का वक्तव्य भी उल्लेखनीय है।

भारत महोत्सव 2004 के अंतर्गत भारतीय और स्पेनी संगीत, नृत्य और रंगकला प्रदर्शन, मृदंग वादन, सितारवादन, बांसुरी वादन, भरत नाट्यम, कथकली, भारतीय मिथक, कला और चिन्तन इक्कीसवीं सदी में, बोलिवुड सिनेमा प्रदर्शन आदि बहुरंगी कार्यक्रम कासा इंदिया में हुए। भारत महोत्सव 2006 में भी इन्हीं का दुबारा प्रदर्शन हुआ, तथा माधवी मुदुगै का ओडीसी, फ्लमिंगी संगीत, मालविका सरुक्कायि, अलरमेल वल्ली आदि का भरत नाट्य, भारती शिावजी का मोहिनियाट्टम, अक्कमहावदेवी के वचनों पर आधारित मोनिका द ला फुयंते का नृत्य, सोमजित दासगुप्त का सरोदवादन आदि का अपना सांस्कृतिक महत्व है। कासा इंदिया के वर्तमान कार्यालय के उद्घाटन के निमित्त रविशंकर के संयोजन में अनौशिाका शंकर का सितारवादन, कास्तिल्या लयोन ओरक्वेस्ट्रा के संयोजन में आयोजित संगीत समारोह विशोष आकर्षण के केन्द्र थे। संगीतकार रविप्रसाद की कार्यशाला और रवीन्द्रनाथ टैगोर का स्पेनी धरती से संबंध पर खोसे पास, रविशंकर दो राष्ट्रों के बीच पर रुबन लोपेज़ कनो, पवित्र नगर काशी पर ओस्कार पुखोल आदि के वक्तव्य भी संपन्न हुए थे। सत्यजित राय की फिल्मों की प्रदर्शिानी भी आरंभिक आकर्षणों में थी।

पंडित दीनानाथ मिश्र और भोलानाथ मिश्र का हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत, मृगया ग्रुप की कौआली, पं. अमरनाथ की बांसुरी, राधिका झा का ओडिसी नृत्य, सुभाष शब्बु और ज़ीनत अंजुमन का नृत्त संगीत, दक्षिण एवं उत्तर भारतीय संगीतों की समन्वय प्रस्तुति, स्पेनी कलाकारों के साथ भारतीय संगीतज्ञ रविप्रसाद की संयुक्त संगीत प्रस्तुति आदि वल्लदोलिद शहर को भारतीय और स्पेनी कलाकारों की देन बने।

भारत के महान फिल्म अभिनेताओं के साथ साथ निर्देशकों की भी उपस्थिति इस संस्था के रंग में रंग भरने लायक थी। मीरा नायर, वरशा बेदी, बोब्बी, गोविन्द निहलानी, शयाम बेनगल, अरुणा वासुदेव आदि हस्तियाँ हमेशा स्पेनी सिनेमा दर्शकों और आम जनता को प्रेरक बन बैठीं। बाद में बोलिवुड सिनेमा कार्यशाला में या बोलीवुड मसाला में इसकी अनुगूंज अवशय दिखाई भी देती कि पूरे सभागर भीड़ से भर जाता।

भारतीय स्वतंत्रता दिवस की पचासवीं वर्षगांठ विविध कार्यक्रम से यहाँ मनाया गया। दक्षिण एशिायाई फिल्म संगठन, वल्लदोलिद विश्वविद्यालय के एशिायाई अध्ययन केन्द्र और कासा इंदिया के संयुक्त तत्तावधान में सिनेमा प्रदर्शन, दो संगीत समारोह, भारतीय पाकविद्या पर तीन दिवसीय कार्यशाला, स्पेन के भारत से गोद लिये परिवारों का मिलन जिसका कथ्य रहा - ''दो संस्कृतियाँ - भारत में स्पेन'', भारत स्कूल के बच्चों की अंतर्सांस्कृतिक कार्यशाला, और फिल्म डोक्युमेन्टरी आदि संपन्न हुए। 13 अक्तूबर से 16 नवंबर 2007 को भारतीय अनुष्ठान कला और संगीत समारोह आयोजित हुआ। स्पेनी सांस्कृतिक मंत्रालय, कासा आसिया, जनवादी कलाकेन्द्र, और इटली की दो संस्थायें जैसे हरशरण फाउण्डेशन का दानियेलो शिाक्षा केन्द्र और फाउण्डाशिायोन लवोरतोरि ओफिसिने गलीलियो, आदि इस के सहसंयोजक थे। प्रस्तुत समारोह में भी भारतीय संगीत, नृत्य, डोक्युमेन्टरी आदि का सही समायोजन हुआ। फ्रांसीसी अलयिन दानियेलो के जीवन पर आधारित फोटो प्रदर्शिानी भी उसी में शामिल था। अक्तूबर-नवंबर 2007 में ''भारत - तीन संस्कृतियों के साथ'' विषयक कार्यक्रम चलाया गया, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता की स्पेनी एजैंसी का साथ था। इस साल दीवाली भी धूम धाम से यहाँ मनायी गयी जहाँ पूजा अनुष्ठान, मिठाई सेवन, नृत्य, तथा भोजन आदि आयोजित किये गये। दिसंबर को खोसे रमोन हुयिदोब्राो का -भारत के महानगरों, गलियों और बस्तियों की फोटोग्राफी के साथ कविताओं की प्रदर्शिानी -सोती गाड़ी- (च्थ्ड्ढड्ढद्रत्दढ़ च्र्द्धठ्ठत्द) के नाम से लगायी गयी। इसके साथ साथ स्थानिक कलाकारों के रूप में गायक नंदकुमार, रवि प्रसाद, बालूजी श्रीवास्तव, निर्मल्य देय, और नर्तकियाँ रमा वैद्यनाथन, मोनिका द ल फुयंते आदि कलाकारों का स्थिर सामीप्य भी भारत भवन की कलासपर्या को संपन्न बनाता रहा, और इन्हीं कलाकारों से अवकाशकालीन कार्यशालायें भी होती रही हैं।

भारतीय भवन की सन् 2008 की उल्लेखनीय कार्यक्रमों में स्पेनी भारतीयों के लिए खुला दिवस 17 मई को माना गया, जहाँ कासा इंदिया का दरवाज़ा सारे प्रवासी भारतीयों के लिए खुला रखा। विश्व एशिायाई मासिक -ग्लोबल एशिाया - का विमोचन वल्लदोलिद के कासा रेविल्या में 19 मई को हुआ। सितंबर 13 को केरल का प्रसिद्ध त्योहार ओणम भी धूम धाम से मनाया गया, जिसमें केरलीय हिन्दी आचार्य विजयकुमारन की अहम भूमिका रही।

2 अक्तूबर 2008 की विश्वप्रसिद्ध घटना महात्मा गांधीजी के जन्मदिन को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में स्पेन में मनाने का पूरा श्रेय इस संस्था को है। इधर 'प्लासा दे ला पाज़' (शांति पार्क -दलीसिया) में गांधीजी की अर्धकाय प्रतिमा (जो 2001 में भारत सरकार द्वारा वल्लदोलिद नगरपालिका को भेंटी गयी) पर भारतीय राजदूत श्रीमती सुजाता मेहता, वल्लदोलिद महापौर, विश्वविद्यालय के कुलपति, उपकुलपति, कासा इंदिया के निदेशक गियर्मो रोद्रिगेज़, हिन्दी के अतिथि आचार्य विजयकुमारन और अन्य राजनेताओं का मिलकर श्रद्धासुमन चढ़ाना हुआ और तदनंतर राजदूत आदि का संबोधन हुआ। तदनंतर 'स्पेनी कोनडेसा ऐलो सेकैंडरी स्कूली' बच्चों का गांधीजी के प्रिय भजन -''रघुपति राघव राजा राम''- का गायन हुआ। उसी शाम को कासा इंदिया में - Does Gandhiji Matter ? - फिल्म का प्रदर्शन, और रूबेन कांपोस पलारिया की किताब -महात्मा गांधी-अहिंसा की राजनीति - का लोकार्पण तथा -इक्कीसवीं सदी में गांधीजी की पुनःखोज -अहिंसा की राजनीति के उन्नायक -भाषण भी संपन्न हुआ। राजदूत की उपस्थिति आद्यंत उस दिन कासा इंदिया में बनी रही।

4 अक्तूबर को गुजरात के महापौर कनौजी ठाकुर द्वारा द्विराष्ट्रीय अंतर्संबंध को बढ़ाने हेतु वल्लदोलिद के महापौर फ्रांसिसको खावियर लयोन द रिवा के साथ दोनों महानगरों के मैत्री संबंध बढ़ाने की पद्धति सौंपी गयी, जिसके परिणामस्वरूप अगले साल 3 अक्तूबर 2009 को कासा इंदिया के लिए गुजरात की हवेली का एक मोडल वास्तु का निर्माण किया गया और हमेशा के लिए यह स्पेन के स्मृतिचिह्न के रूप में बगीचे में स्थापित किया गया।

25 अक्तूबर को दीवाली का रंगीन कार्यक्रम भी यहाँ संपन्न हुआ जिसमें दीवाली पूजा, भारतीय शौली में देवी अर्चना, आतिशबाजी, नाच-गान और भोजन आदि का प्रबंध किया गया। भारत भवन से लेकर गली तक दीयों से जलाकर आमंत्रित मेहमानों को दीवाली का माहात्म्य भी समझाया गया। नवंबर-दिसंबर के अन्य आकर्षणों में अंतर्राष्ट्रीय कथकली केन्द्र के द्वारा -कल्याणसौगंधिक और दुर्योधनवध कथकली, संजय सुब्राहृण्य का कर्नाटिक संगीत, बैंगलूर के नृत्यग्राम डैंस थियटर के ओडीसी समूहनृत्य आदि रहे।

2008 के अन्य कार्यक्रमों में विश्वप्रसिद्ध चित्रकार रघुराय की फोटो प्रदर्शिानी, अपूर्वा मजूमदार की पैसेज त्रू इंदिया प्रदर्शिानी, आदि के साथ साथ भारतीय सिनेमा प्रदर्शन, जिसके लिए मलयालम अभिनेता एवं निदेशक का भी सामीप्य हुआ। 26 से 29 जून तक 'रात्रिमषा', 'तनिये', 'ओरे कडल', 'अडयालंगल', 'तकरचेंडा', 'दृष्टांतम्', 'मिनुक्कु' जैसे राष्ट्रीय पुरस्कृत मलयालम फिल्मों के साथ ही विनोद मनक्करा की एक डोक्युमेन्टरी 'Before The Brush Dropped' का भी फिल्मांकन हुआ। प्रतिभाराय की कहानी पर आधारित फिल्म -मोक्ष' इस सिलसिले की आगे की कडी थी। केरल की श्रीमती लता कुर्यन के द्वारा प्रस्तुत 'सीता धारती की बेटी' विषयक भित्तिचित्त प्रदर्शिानी भी दिसंबर की, कडाके की सर्दी में भी जनता को आकर्षित करती रही।

  प्रो. विजयकुमारन
.सी.पी.वी, भूतपूर्व अतिथि आचार्य हिन्दी,
एशियाई अध्ययन केन्द्र, वल्लदोलिद विश्वविद्यालय,
47005- वल्लदोलिद, स्पेन
hindi.vijay@gmail.com
vijayakumarancpv@yahoo.com
 
         
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