लंदन । नेहरू सेटर, लंदन में 21 जुलाई 2010 के दिन कथा यूके और एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स द्वारा प्रकाशित ‘ब्रिटेन की उर्दू क़लम’ का लोकार्पण भारतीय उच्चायोग के मंत्री (समन्वय) आसिफ़ इब्राहिम ने किया । इसका संपादन तेजेन्द्र शर्मा एवं ज़कीया ज़ुबैरी ने किया है जिसमें ब्रिटेन में बसे 8 उर्दू कहानीकारों की 16 कहानियों का हिंदी अनुवाद प्रकाशित है। प्रो. अमीन मुग़ल ने कहा कि हिंदी और उर्दू बहुत नज़दीकी भाषाएँ हैं और दोनों के बीच आदान-प्रदान की लम्बी परम्परा है । इस अवसर पर भोपाल के हरि भटनागर ने अपने आलेख में कहा कि संकलन की कहानियाँ ग़म की कथा को रो पीट कर, चिल्ला चोट कर के नहीं बल्कि बहुत ही ख़ामोश ढंग से व्यक्त करती हैं कि कथा का कलात्मक वैभव कहीं भी क्षतिग्रस्त नहीं होता और सबसे बड़ी बात यह कि उस निज़ाम का चेहरा बेनक़ाब होता है जो भेदभाव की राजनीति कर के लोगों में फूट डालता है और उन्हें कहीं का नहीं छोड़ता।

तेजेन्द्र शर्मा ने हिन्दी और उर्दू दो भाषाओं के बीच की दूरी को पाटने की बात की । नेहरू सेंटर की निदेशक मोनिका मोहता ने भी संबोधित किया । पत्रकार अजित राय इस पुस्तक के प्रकाशन को ऐतिहासिक घटना कहा । एशियन कम्यूनिटी आर्ट्स की अध्यक्ष ज़कीया जुबैरी ने आभार प्रदर्शन में कहा कि हिन्दी और उर्दू की गंगा जमुनी तहज़ीब, शब्दों की मिठास, अपनापन, ख़ुलूस सब हमारे साहित्य और ज़िन्दगी का हिस्सा बन जायें। हमारे रिश्ते राजनीति से संचालित न हों। आयोजन में सूरज प्रकाश की नवीनतम कृति दाढ़ी में तिनका का विमोचन एक युवा पाठिका हेमा कंसारा ने किया।
कार्यक्रम में उर्दू कहानीकार जितेन्द्र बिल्लु, सफ़िया सिद्दीक़ि, मोहसिना जीलानी, बानो अरशद एवं फ़हीम अख़्तर, फ़िल्मकार यावर अब्बास, भूतपूर्व बीबीसी हिन्दी अध्यक्ष कैलाश बुधवार, हिन्दी कथाकार दिव्या माथुर, उषा राजे सक्सेना, कादम्बरी मेहरा एवं महेन्द्र दवेसर, कवि निखिल कौशिक, शिक्षाविद वेद मोहला, नाटककार इस्माइल चुनारा, अयूब औलिया, हिन्दी एवं संस्कृति अधिकारी आनंद कुमार, भारत के फ़िल्म आलोचक विनोद भारद्वाज, लदंन और आसपास के शहरों के हिंदी और उर्दू के रचनाकार बड़ी संख्या में मौज़ूद थे।

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