हैदराबाद। ''उत्तर-आधुनिकता बेहद उलझी हुई अवधारणा है। इसकी सैद्धांतिकी और हिन्दी साहित्य में उसके प्रतिफलन की पड़ताल करने वाला 'स्रवंति' का विशेषांक विषय की यथासंभव सीधी पहचान के कारण पठनीय और संग्रहणीय है।स्त्री, दलित, आदिवासी और जनजातीय हाशियाकृत समुदायों की अभिव्यक्ति का उत्तर-आधुनिक विमर्श के पहलुओं के रूप में विवेचन इसमें सभी विधाओं के सन्दर्भ में किया गया है जो इसे शोधार्थियों के लिए विशेष उपयोगी बनाने वाला है।''

ये विचार यहाँ 5 मार्च 2011 उच्च शिक्षा और शोध संस्थान के 'साहित्य संस्कृति मंच' के तत्वावधान में आयोजित दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की साहित्यिक पत्रिका 'स्रवंति' के विशेषांक के लोकार्पण समारोह में अँगरेज़ी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय (इफ्लू) के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. एम.वेंकटेश्वर ने व्यक्त किए। उन्होंने मुख्य अतिथि के रूप में पत्रिका के ''उत्तर-आधुनिक विमर्श और समकालीन साहित्य '' विशेषांक का लोकार्पण करते हुए कहा कि लघु पत्रिका के रूप में 'स्रवंति' ने दक्षिण भारत में अनेक नए लेखकों को प्रोत्साहित किया है तथा इस तरह हिंदी आंदोलन को प्रसारित करने में अग्रणी भूमिका निभाई है।

समारोह की अध्यक्षता गैर-यूनिस विश्वविद्यालय, बेनगाज़ी [लीबिया] के अँगरेज़ी विभागाध्यक्ष प्रो.गोपाल शर्मा ने की। उन्होंने याद दिलाया कि आज दुनिया तेज़ी से उत्तर - उत्तर आधुनिकता की ओर बढ़ रही है। उन्होंने ट्यूनीशिया,मिस्र और लीबिया की जन क्रांतियों और साथ ही मज़हबी कट्टरवाद के उभार को उत्तर आधुनिकता की समाप्ति और उत्तर-उत्तर आधुनिकता के आरम्भ का लक्षण माना। प्रो. शर्मा ने नव-मीडिया के व्यापक प्रभाव की चर्चा करते हुए कहा कि आने वाले समय में हर पाठक को लेखक बनना होगा।

समारोह के द्वितीय चरण में 'स्रवंति' की सह-संपादक डॉ. गुर्रमकोंडा नीरजा को मोतियों की माला, शाल, श्रीफल, लेखन सामग्री, स्मृति चिह्न और पुष्प गुच्छ प्रदान कर उनका सारस्वत सम्मान किया गया। साथ ही कोसनम नागेश्वर राव को भी उत्तम कार्य के लिए शाल और स्मृति चिह्न प्रदान किया गया।

इसके पूर्व संस्थान के अध्यक्ष प्रो. ऋषभदेव शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया।आंध्र-सभा के सचिव डॉ. पी. राधाकृष्णन ने गतिविधियों की जानकारी दी। डॉ. जी. नीरजा ने लोकार्पित विशेषांक का परिचय दिया। समारोह के तीसरे चरण में विशेष अतिथि कवयित्री ज्योति नारायण, डॉ. बी. बालाजी, चंद्रमौलेश्वर प्रसाद, भगवान दास जोपट, गुरु दयाल अग्रवाल और विनीता शर्मा ने काव्य-पाठ किया। संपूर्ण समारोह का संचालन डॉ. बलविंदर कौर ने अत्यंत सफलता और रोचकता पूर्वक किया।

  

 
         
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