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 पटना। आई आई बी एम सभागार में डॉ.उत्तम सिंह की अध्यक्षता में महाकवि काशीनाथ पाण्डेय का जयंती समारोह सुसंपन्न हुआ। सर्वश्री श्रीराम तिवारी, विशुद्धानंद पाण्डेय, डॉ.शंकर, डॉ.सतीशराज पुष्करणा, डॉ.लक्ष्मी सिंह, कल्याणी सिंह, डॉ.पुष्पा जमुआर, डॉ.विनोद कुमार मंगलम, अरुण शाद्वल एवं डॉ. बी .एन.विश्वकर्मा ने समवेत रूप से दीपप्रज्जवलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की।कलाकक्ष के महासचिव और महाकवि के सुपुत्र प.अविनय काशीनाथ ने महाकवि की ग़ज़लों को स्वरबद्ध कर गाया।

अपने स्वागत संबोधन में विश्वकर्मा जी ने महाकवि को अद्वितीय नव- प्रतिभा पोषक कहा वहीं डॉ. कुमार मंगलम ने महाकवि की भाषिक ध्वन्यन की पकड़ और उस पर आधिपत्य पर अपना वक्तव्य दिया और उन्हें "पोएट ऑव वर्ब" कहा। पुष्पा जमुआर ने उनकी विराटता की चर्चा की तो लक्ष्मी सिंह ने उन्हें स्त्री शक्ति का सम्मान करनेवाला बताया वहीं कल्याणी सिंह ने इन महान कवि को इन कार्यक्रमों के माध्यम से जानने का सौभाग्य प्राप्त होने की बात स्वीकारी।अरुण शाद्वल ने काशीनाथ जी से अपने प्रथम भेंट की चर्चा करते हुए उनकी सहजता और गुणग्राहिता के सम्मोहन की चर्चा की।

श्रीराम तिवारी ने अपने राँची के ही समय(60के दशक) की चर्चा की और महाकवि के उन दिनों की भीषण रचनात्मकता और पराक्रम की चर्चा करते हुए उन्हें संसार के विलक्षणतम कवियों में से एक कहा वहीं शंकर प्रसाद ने अपने आकाशवाणी के दिनों की चर्चा के माध्यम से काशीनाथ जी के राँची और पटना में अपने निरंतर बढ़ते सामीप्य पर पक्ष रखते हुए कहा कि ज़माना उन विराट लोगों के साथ उनके समय में कम ही रह पाता है जो नितांत मौलिक धारणा के धारे हों..महाकवि उनमें से एक हैं जिनका उचित मूल्यांकन अभी शेष है।विशुद्धानंद पाण्डेय ने उनकी आध्यात्मिक शोध की चर्चा करते हुए फ़िल्मों -सुहाग बिंदिया, गंगा आबाद रखिह सजनवा के, माई आदि तक केलिए उनके अनूठे लेखन, पोषण की चर्चा की।

सतीशराज पुष्करणा ने महाकवि की रचनाओं पर आलोचनात्मक ग्रंथ निकालने और देश-विदेश की पत्रिकाओं में उन्हें छपने भेजने का मार्ग सुझाया ताकि उनकी बहुआयामी रचनात्मकता के मूल्यांकन का काम यथार्थ रूप ले सके।साथ ही उन्होंने हिंदी के शोधार्थियों को महाकवि पर ही शोध करने/कराने का ज़िम्मा भी लेने को कहा जिसे डॉ.कुमार मंगलम ने फ़ौरन स्वीकार किया कि उनके तत्वावधान में अगला शोधार्थी महाकवि काशीनाथ पाण्डेय पर ही शोध करेगा वहीं डॉ.लक्ष्मी सिंह ने महाकवि के वाङ्मय पर आलोचना ग्रंथ केलिए अपने सहयोग का भरोसा दिया। सर्वांत में अध्यक्ष डॉ.उत्तम सिंह ने अपने पिता के मित्र रूप में महाकवि की चर्चा और उनके प्रति श्रद्धा-सम्मान की बात की और ये कहा कि जितने भी कवि राष्ट्रीय फलक पर वर्णित चर्चित हुए उसका बहुत बड़ा माध्यम उन कवियों की रचनाओं का पाठ्यक्रम में शामिल होना है। क्यों न महाकवि काशीनाथ पाण्डेय की रचनाओं केलिए हमसब मिलकर यह काम करवाएँ !धन्यवाद ज्ञापन महाकवि के अग्रज-पुत्र रविशंकर पाण्डेय ने किया।

महाकवि की # कुछ पूजा के आयोजन सा होने लगता#अब न पाँखी बोलेगा तो जीया नहीं जाएगा#फ़ॉसिल्स में से दो कविताएँ, बयानेक्रौंचताइर का स्तुतिखण्ड(व्याजस्तुति) ए री सरकारनी का पाठ कलानेत्री पल्लवी विश्वास और प.अविनय काशीनाथ ने किया जिसे खूब सराहा गया।

"जनमदिन तुम्हारा मिलेंगे लड्डू हमको" -यह कहकर बालसुलभ आह्लाद से भरनेवाले महाकवि काशीनाथ पाण्डेय के जन्मदिन पर सर्वश्री डॉ.अनंताशुतोष द्विवेदी, राजकुमार प्रेमी, लीना श्रीवास्तव, ओमप्रकाश पाण्डेय, ओमप्रकाश वर्मा, रेणु पाण्डेय, अमृत सागर, रौशन महाराज, विशाल पाण्डेय, नीतीश कुमार, योगेंद्र योगी, प्रणव, आयुर्मान यास्क, विनोद कुमार, कृष्णमोहन झा समेत अनेक युवा कवि-कविता प्रेमी सबने लड्डू पाकर विदा लिया।