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प्राण शर्मा की चार ग़ज़लें

प्रकाशन :शनिवार, 1 मई 2010
प्राण शर्मा

एक

मिट्टी के बीजों को बोने कोंई चला है मेरे भाई
मान न मान मगर ये भी तो एक कला है मेरे भाई

इतना प्यारा, इतना न्यारा तेरा चेहरा क्यों न लगे
मौसम के फल जैसा ही तू रोज़ फला है मेरे भाई

वो इक शख़्स उदासी जिसके चेहरे का नित पहरावा है
हँसती-मुस्काती नज़रों को रोज़ खला है मेरे भाई

यूँ तो यारों की गिनती से हमको गुरेज़ नहीं लेकिन
जीवन में बस इक साथी का साथ भला है मेरे भाई

तेरी नासमझी न कहूँ तो बतला मैं क्या और कहूँ
तपती सड़कों पर तू नँगे पाँव चला है मेरे भाई
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  प्राण शर्मा
3 Crackston Close,
Coventry, CV2 5EB, UK
pransharma@talktalk.net
 
         
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