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वर्षा –मुक्तक (गुजराती)

प्रकाशन :मंगलवार, 1 अगस्त 2006
मूल रचनाः जयंत पाठक, अनुवादः डॉ.वर्षा दास

भाषांतर
 

गुजराती

मूल रचनाः जयंत पाठक
अनुवादः डॉ.वर्षा दास

वर्षा –मुक्तक

आज अब

जो खुल गये दरवाज़े,

कसकर बंद नहीं होते –

फूले नहीं समाते थे

अतीत के अरण्यों की याद में
 



  मूल रचनाः जयंत पाठक, अनुवादः डॉ.वर्षा दास

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