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अंडा पहले आया या मुर्गी?

प्रकाशन :सोमवार, 8 अगस्त 2011
पत्रिका से साभार
यह सवाल सदियों से वैज्ञानिकों और दर्शन शास्त्रियों को मथता रहा है कि कौन पहले आया, मुर्गी या अंडा? आप बताइए कि कौन पहले आया? अगर आप कहेंगे कि अंडा, तो अगला सवाल होगा कि अंडा दिया किसने? और अगर आप कहेंगे कि मुर्गी पहले आई तो सवाल होगा कि मुर्गी आसमान से तो टपकी नहीं होगी, वह किसी अंडे से ही निकली होगी!
अगर वह अंडे से निकली तो अंडा पहले से था...। आप चकरा जाएंगे, झुंझला जाएंगे....परेशान हो जाएंगे, लेकिन जवाब मिलेगा नहीं।
लेकिन अब यह परेशानी दूर होती दिख रही है, क्योंकि शेफील्ड और वारविक विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि उनके पास इस सवाल का जवाब है। उन्होंने कम्प्यूटर मॉडलिंग का उपयोग करते हुए एक प्रोटीन का पता लगाया है जिसे ओसी17 या ओवोक्लीडीन 17 के नाम से जाना जाता है। यह प्रोटीन तेजी से अंडे का खोल तैयार करने में सहायता करता है।
शेफील्ड यूनिवर्सिटी के डॉक्टर कोलिन फ्रीमैन इसे कुछ यूं समझाते हैं कि मुर्गी के अंडे का खोल बनाने के लिए आपके पास मुर्गी होनी चाहिए। आप तर्क दे सकते हैं कि आपको ओसी17 प्रोटीन की जरूरत होगी और वह मुर्गी के पास है। क्योंकि अंडे का खोल तैयार करने के लिए जिस प्रोटीन की जरूरत है वह सिर्फ मुर्गी के अंडाशय में होता है। वह मुर्गी के शरीर में और कहीं नहीं होता।
अरे, यह तो एकदम सीधा सा जवाब है। अंडे का खोल तैयार करने के लिए जिस प्रोटीन की जरूरत होती है, वह सिर्फ मुर्गी के अंडाशय में होता है। तो इसका मतलब है कि अंडा मुर्गी से आया। वाह, मिल गया जवाब! लेकिन...एक सैकंड....जरा यह तो बताइए कि अंडे देने के लिए मुर्गी कहां से आई? इसका जवाब भी डॉक्टर फ्रीमैन के पास है। वे कहते हैं कि मुर्गी कुछ उन पक्षी प्रजातियों से पैदा हुई जो अंडे देते हैं। तो इसका मतलब यह हुआ कि मुर्गी अंडे से पैदा हुई...लेकिन थोड़ी देर पहले हम इस नतीजे पर पहुंचे थे कि अंडा मुर्गी ने दिया....। उफ्फ, यह उलझन तो दूर ही नहीं होती।
  पत्रिका से साभार

 
         
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