जल्दी उठना सीखो मेडम
जल्दी सोना सीखो मेडम,
फूल लगे मुरझाने फिरसे
अब बगिया को सींचो मेडम।
नाजुक है रिश्तों की डोरी
अब ज्यादा न खींचो मेडम,
बाथरूम में पड़े हैं कपड़े
जल्दी जाकर फींचो मेडम।
जानो दुनियां की सच्चाई
यूं न आंखें मीचो मेडम,
मिला तुम्हें कर्मों का फल है
अब न इतना चीखो मेडम।
मन आंगन में भरी गंदगी
बाहर उसे उलीचो मेडम,
सर्दी खांसी वाली है यह
मत बारिस में भीगो मेडम।
हमें सिखाती हो अनुशासन,
खुद अनुशासन सीखो मेडम।

जल्दी सोना सीखो मेडम,
फूल लगे मुरझाने फिरसे
अब बगिया को सींचो मेडम।
नाजुक है रिश्तों की डोरी
अब ज्यादा न खींचो मेडम,
बाथरूम में पड़े हैं कपड़े
जल्दी जाकर फींचो मेडम।
जानो दुनियां की सच्चाई
यूं न आंखें मीचो मेडम,
मिला तुम्हें कर्मों का फल है
अब न इतना चीखो मेडम।
मन आंगन में भरी गंदगी
बाहर उसे उलीचो मेडम,
सर्दी खांसी वाली है यह
मत बारिस में भीगो मेडम।
हमें सिखाती हो अनुशासन,
खुद अनुशासन सीखो मेडम।
पी. दयाल श्रीवस्तव
12 शिवम सुंदरम नगर, छिंदवाड़ा,
(म.प्र.) 480001
मो.- 9713355846
pdayalshrivastava@rediffmail.com
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