श्रेणियाँ

कड़क ठंड है

प्रकाशन :बुधवार, 1 फरवरी 2012
पी. दयाल श्रीवस्तव
कितनी ज्यादा कड़क ठंड है
करते सी-सी पापा,
दादा कहते शीत लहर है
कैसे कटे बुढ़ापा।

बरफ पड़ेगी मम्मी कहतीं
ओढ़ रजाई सोओ,
किसी बात की जिद मत करना
अब बिलकुल न रोओ।

किंतु घंटे दो घंटे में
पापा चाय मंगाते
बार बार मम्मीजी को ही,
बिस्तर से उठवाते।

दादा कहते गरम पकोड़े
खाने का मन होता,
नाम पकोड़ों का सुनकर
किस तरह भला मैं सोता।

दादी कहती पैर दुख रहे
बेटा पैर दबाओ,
हाथ दबाकर मुन्ने राजा
ढेर आशीषें पाओ।

शायद बने पकोड़े आगे
मन में गणित लगाता,
दादी के हाथों पैरों को
हँसकर खूब दबाता।
  पी. दयाल श्रीवस्तव
12 शिव‌म‌ सुंद‌र‌म न‌ग‌र‌, छिंद‌वाड़ा,
(म‌.प्र.) 480001
मो.- 9713355846
pdayalshrivastava@rediffmail.com
 
         
Bookmark and Share
टिप्पणी लिखें
 
वाक्यांश खोजें




Bing


Site Search Site Search
लेखागार (Archive)

RoboForm: Learn more...