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चन्द्रसेन विराट
जन्म-
3 दिसम्बर,
1936, इंदौर (मध्यप्रदेश)
शिक्षा-
नागरी यांत्रिकी में स्नातक
व्यवसाय-
लोक निर्माण विभाग से अधीक्षण यंत्री पद से सेवानिवृति उपरांत स्वतंत्र लेखन
उपलब्धि-
अग्रिम पंक्ति के गीतकार
मारीशस और श्रीलंका की साहित्यिक यात्रा
रचनाकार पर केंद्रित कार्य-
विराट वैभव एवं चन्द्रसेन विराट के प्रतिनिधि गीत
कृतियाँ-
गीत संग्रह
मेंहदी रची हथेली
स्वर के सोपान
ओ मेरे अनाम
किरण के कशीदे
मिट्टी मेरे देश की
पीले चावल द्वार पर
दर्द कैसे चुप रहे
भीतर की नागफनी
पलकों में आकाश
बूँद-बूँद पारा
सन्नाटे की चीख
गाओ कि जिये जीवन
ग़ज़ल संग्रह
निर्वसना चाँदनी
आस्था के अमलताल
कचनार की टहनी
धार के विपरीत
परिवर्तन की आहट
लड़ाई लम्बी है
न्याय कर मेरे समय
फागुन माँगे भुजपाश
इस सदी का आदमी
हमने कठिन समय देखा है
मुक्तक संग्रह
कुछ पलाश कुछ पाटल
कुछ छाया कुछ धूप
कुछ सपने कुछ सच
संपादन
गीत गंध
हिंदी के मनमोहक गीत
हिंदी के सर्वश्रेष्ठ मुक्तक
पुरस्कार-
मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् का माखन लाल चतुर्वेदी पुरस्कार
म.प्र. साहित्य परिषद् का सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार
अभियान द्वारा दिव्य अलंकरण
हिंदी साहित्य सम्मेलन का वागीश्वरी पुरस्कार
हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा साहित्य सारस्वत उपाधि
गुजरात हिंदी विद्यापीठ, द्वारा हिंदी गरिमा सम्मान
सृजन-सम्मान, छत्तीसगढ़ का नारायण लाल परमार सम्मान
छंद विधा में अप्रतिम कार्य हेतु
दर्जनों अन्य पुरस्कार
संप्रति-
समय, 121-वैकुंठधाम कॉलोनी, इंदौर, मध्यप्रदेश, 452018

अगस्त(2006) माह के छंदकार
प्रसंग गलत है
गाओ कि जिये जीवन
संवाद नहीं होता
अब भी बरसो
तुझसे ग़ज़ल ग़ज़ल है
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