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पत्रकारिता की पहली पाठशाला छत्तीसगढ़ मित्रः पंकज
रायपुर।
पत्रकारिता की पहली पाठशाला का नाम छत्तीसगढ़ मित्र के जरिए पं. माधवराव
सप्रे ने पत्रकारिता को लोकजागरण का मंच बनाया । छत्तीसगढ से निकलने वाले
इस पत्र में राष्ट्रीय समालोचना और सामाजिक राजनीतिक मुद्दों पर गंभीर
दिप्पणियां प्रकाशित होती थी । सप्रे ने ऐसे दौर में पत्रकारिता की नींव
रखी, जब जीवनयापन और राष्ट्रीय आंदोलन की चुनौतियां समान रूप से थी । यह
विचार आज पं. पाधव राव सप्रे की जयंती पर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं
जनसंचार विश्वविद्यालय में वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘सद्भावना
दर्पण’
के संपादक गिरीश पंकज ने व्यक्त किए ।
कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में सोमवार को जयंती का आयोजन किया
गया । इस अवसर पर श्री पंकज ने कहा कि पत्रकारिता के लक्ष्य और उद्देश्य को समझने
के लिए मित्र से गुजरना होगा । मित्र में सामयिक खबरों के अलावा विमर्श के
ही मुद्दे होते थे । मित्र का मतलब था वैश्विक बोध, विश्व बंधुत्व और
रचनाधर्मिता । राष्ट्रीय सेतर की रचनाओं के अनुवाद मित्र में प्रकाशित होते
थे और उसके माध्यम से टिप्पणियां की जाती थी । अनुवाद को आधार बनाकर
पत्रिका निकालने का प्रयास पहली बार श्री सप्रे ने किया । छत्तीसगढ़ मित्र
में संपादकीय अलग से नहीं होता था, लेकिन उसमें रोचक टिप्पणियां होती थीं,
जिसने पत्रकारिता की उच्च आदर्श परंपरा को जन्म दिया ।
इस मौके
पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ‘हरिभूमि’
के स्थानीय संपादक संजय द्विवेदी ने पत्रकारिता की नई प्रवृतियों की चर्चा
करते हुए कहा कि पत्रकारिता की भावभूमि ऐसी है कि वह जन सरकारों से नाता
नहीं तोड़ सकती है । मीडिया में नया लोकतंत्र आया है,
जो खबरों को दबाने
नहीं बल्कि खबरों को बताने की आजादी देता है,
मिशन और प्रोफेशन की बहस करना बैमानी है क्योंकि यह अपने-अपने दृष्टिकोण से
तय होती है, जो मिशन की पत्रकारिता करना चाहते हैं,
उनके लिए रास्ते आज भी
खुले हैं ।
श्री द्विवेदी ने कहा
कि अखबार के आकार की विविधता ने संपादकों का नियंत्रण अखबार से खत्म कर
दिया है। ज्यादा पृष्ठ और बहु संस्करणों के कारण अखबार आज उप संपादकों का
हो गया है उन्होंने पत्रकारिता के अंदर आ रही नई खरपतवार को खतरा निरूपित
किया । इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने
विद्यार्थियों को सप्रे के जीवनी और उनकी पहली हिंदी कहानी का वाचन किया ।
अतिथियों का स्वागत करते हुए संकायाध्यक्ष डॉ. शाहिद अली ने पत्रकारिता के
महत्व को रेखांकित किया
। सुभाषचंद्र
सुमन,दीपा, गौरव त्रिपाठी और चंद्रेश कुमार ने अतिथियों का अभिनंदन किया ।
प्रारंभ में अतिथियों ने श्री सप्रे के चित्र पर माल्यार्पण किया और दीप
प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की । कार्यक्रम का संचालन एमजे के छात्र
अभिषेक गुप्त ने किया । आभार प्रदर्शन नृपेंद्र शर्मा, व्याख्याता ने किया ।

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