सृजन-गाथा

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अंक-3, अगस्त, 2006   

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अंतरजाल

 

अंतरजाल                   ई-कॉमर्स में कैरियरः रविशंकर श्रीवास्तव

मीडिया-विमर्श          किस पर हम कुर्बान : संजय द्विवेदी  

विचार                         आध्यात्म साहित्य की एक विधा है तंत्र : पं.गिरधर शर्मा

लोक-आलोक              कभी पारंपरिक बरतनों का साम्राज्य था:  डा.तृषा शर्मा

हिन्दी-संसार               खाडी क़े देशों में हिंदी का विकास: पूर्णिमा वर्मन       

मूल्यांकन                    विश्वसनीय आश्रय स्थलः छांदस कविताएं: लालसालाल तरंग

प्रसंगवश                     तुलसी का रामचरित मानसः राही मासूम रज़ा

 

 

 

-कॉमर्स में कैरियर


रविशंकर श्रीवास्तव

 

कॉमर्स को कुछ इस तरह से पारिभाषित किया जाता है- वस्तुओं की अदला-बदली या खरीदी-बिक्री जो कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर से होती है, कामर्स कहलाती है। कॉमर्स की इस परिभाषा में अगर थोड़ा सा और विस्तार दे दें, तथा वस्तुओं के विनिमय, खरीदी-बिक्री को इंटरनेट के जरिए ऑनलाइन आधार पर करने लगें, तो आज की भाषा में इसे ई-कॉमर्स कहेंगे। ई-कॉमर्स का दूसरा नाम है, ऑनलाइन व्यापार। इस ऑनलाइन व्यापार के पीछे सारी दुनिया पागल हुए जा रही है। आखिर इसके पीछे कारण क्या हैं?

 

एक दुकान, भेजिए सारी दुनिया में पकवान

 

ई-कॉमर्स के पीछे अंधी दौड़ के कई कारणों में से एक है, आपकी इंटरनेट की एक दुकान जिससे आपके द्वारा सारी दुनिया भर में, बारहों महीने चौबीसों घंटे व्यापार किए जा सकने की संभावना। ई-कॉमर्स में आपकी ई-बिजनेस की सीमाएं आपके घर-मुहल्ले या देश प्रांत की सीमा से मुक्त हो जाती हैं। फिर आपको किसी आंधी तूफान, बंद या दंगा उत्पात आदि से भी डरने की जरूरत नहीं, चूंकि इनका आपकी ई-कॉमर्स साइट पर कोई असर नहीं होने वाला। आप इंटरनेट पर एक दुकान खोलते हैं, तो उसे चलाने के लिए बहुत सारे व्यक्तियों की आवश्यकता भी नहीं होती। बढ़िया डिजाइन किया हुआ साइट सारा काम आटोमेटिक तरीके से कर न सिर्फ आपके श्रम व समय की बचत करता है, आपके ग्राहक का भी काम आसान करता है। ई-कॉमर्स एक ग्राहक को यह सुविधा भी देता है कि वह विश्व के किसी भी कोने में स्थित ई-कॉमर्स साइट से अपने मन पसंद वस्तुओं को तलाश कर अपने घर में बैठे-बैठे ही सुविधानुसार खरीदी कर सके। एक और सुविधा है कि आपके ग्राहक एक ही प्रकार की अनेक साइटों पर जाकर अपने पसंद की वस्तु के भाव की तुलना कर अपने लिए उचित मूल्य पर खरीदी कर सकते हैं, वह भी धंटों, बिना किसी सेल्समेन या सेल्सगर्ल की टेढ़ी निगाहों का सामना किए। यहां पर एक उपभोक्ता को उसकी वांछित वस्तु से संबंधित समस्त प्रकार की सूचना भी पहले ही मिल जाती है। उदाहरण के लिए अगर आप किसी खास साबुन का आर्डर करते हैं, तो आपको उस साबुन के बनाने में प्रयुक्त समस्त तत्वों की पूर्ण जानकारी, और यहां तक कि वह साबुन कैसे बनाया जाता है, इसका वीडियो फिल्म भी आपको उस ई-कॉमर्स साइट पर आपकी जानकारी हेतु मिल सकता है। फिर आप जब किसी वस्तु की खरीदी के लिए आदेश देते हैं, तो आपका आदेश कहां पर किस पोजीशन पर है, इसकी जानकारी आपको हर समय हर क्षण मिलती रहती है।

 

      ई-कॉमर्स के क्षेत्र में बी2बी यानी व्यापार से व्यापार की भी अपार संभावना है। उदाहरण के लिए, एक थोक विक्रेता अपना सामान विश्व भर में फैले अपने रिटेल विक्रेताओं के साथ ई-कॉमर्स के जरिए अपने व्यापार विस्तार को अंजाम दे सकता है। एक प्रोजेक्शन के अनुसार, आने वाले दो-तीन सालों के भीतर ही ई-कॉमर्स के द्वारा एक खरब रूपयों से भी अधिक का विश्व व्यापार होने लगेगा। तथा ई-कॉमर्स के क्षेत्र में न सिर्फ लगभग सारी ही व्यापारिक संस्थाएं आ जाएंगी, अपितु कुछ बड़ी संस्थाओं का मुख्य कार्यकलाप ई-कॉमर्स  और उससे जुड़े क्षेत्र ही होंगे।

 

      हालाकि भारत में ई-कॉमर्स शुरूआती दौर पर है, तथा मूल ढांचागत व्यवस्था नहीं होने, साइबर सुरक्षा और ई-कॉमर्स व्यापार के कानून के लागू होने के अंदेशों के बीच इस व्यापार के फलने फूलने में थोड़ा समय लगना स्वाभाविक है, मगर फिर भी हवा तेजी से चल रही है। एस. कुमार्स ग्रुप ने एक हजार करोड़ रूपयों की एक योजना बड़े ही जोर शोर से चालू की थी, जो अब अपनी प्रारंभिक अवस्था में आ गई है, और कंपनी भारत भर में सुरक्षित आनलाइन खरीदी-बिक्री के लिए वी-सेट सेटेलाइट लिंक लगा रही है। इस प्रकार से यह क्षेत्र एक क्रांति का पैगाम लेकर आई है। हालांकि ई-कॉमर्स की सफलता को लेकर कुछ क्षेत्रों में संदेह उत्पन्न किए जा रहे हैं, परंतु फिर भी हजारों लोग ई-कॉमर्स के क्षेत्र में जाने की तैयारी कर रहे हैं, और जाहिर है, इस क्षेत्र में काम करने हेतु साफ्टवेयर प्रोफेशनल्स की जरूरतों की भरपाई हेतु अनेकानेक शिक्षण संस्थाएं आपको ई-कॉमर्स की शिक्षा देने हेतु आगे आ चुकी हैं। ऐसे में अगर आप भी औरों की तरह ई-कॉमर्स के क्षेत्र में जुड़ना चाहते हैं, तो दोष आपका नहीं है। बस कुछ सावधानी जरूरी है ताकि आपकी मेहनत और प्लानिंग में पानी न फिर जाए।

 

-कॉमर्स कैरियर: बहुतेरे विकल्प

ई-कॉमर्स में कैरियर हेतु आपके पास बहुत से विकल्प हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, जैसा कि एस. कुमार्स विज्ञापित करते हैं कि ई-कॉमर्स हेतु कंप्यूटर का ज्ञान आवश्यक नहीं है, परंतु फिर भी आपको इतना तो आना ही चाहिए कि आप कंप्यूटर को चालू कर सकें, इंटरनेट पर ब्राउजिंग कर सकें, सर्च कर सकें, आर्डर दे सकें, दिए गए आर्डर को पढ़ कर उसे भेजने की व्यवस्था के साथ ही सूचना दे सकें कि आर्डर भेज दिया गया है इत्यादि। एक बेसिक कोर्स जो कि एक सप्ताह से भी कम का हो सकता है, में आप इन चीजों में पारंगत हो सकते हैं।

 

      दूसरा विकल्प हो सकता है वेब डिजाइनिंग और मल्टीमीडिया का। जाहिर है जब हर व्यापारिक संस्थान ई-कॉमर्स की ओर दौड़ लगाने की तैयारी में है, तो ई-कॉमर्स की दुकानदारी को जमाने के लिए वेब डिजाइनर्स और मल्टीमीडिया डेवलपर्स की भारी मांग रहने की संभावना है। इस हेतु फोटोशॉप, शॉकवेव, एनीमेशन, तथा एचटीएमएल भाषाओं का ज्ञान आपको ई-कॉमर्स रोजगर दिलाने में सहायक हो सकता है, जो कि छ: महीने से साल भर के कोर्स से किसी भी अच्छी संस्था द्वारा आसानी से सीखा जा सकता है। ज्यादा जानकार और विज्ञान तथा तकनालॉजी के जानकार लोगों के लिए ई-कॉमर्स क्षेत्र के प्रोग्रामिंग जैसे जावा, एक्सएमएल, कोरबा, सीजीआई, पर्ल इत्यादि की शिक्षा अत्यंत उपयोगी हो सकती है। इस हेतु एक से दो वर्ष का कोर्स उपयोगी होगा, ताकि प्रोग्रामिंग की बारीकी सीख कर दक्षता हासिल की जा सके। और भी गंभीर च्यक्तियों के लिए सर्वर क्षेत्र की शिक्षा जैसे कि ऑरेकल 8 आई, एसक्यूएल सर्वर, सर्वर इंस्टालेशन एवं मैनेजमेंट, इंटरनेट एप्लीकेशन, वेब सुरक्षा आदि से संबंधित कोर्स जोकि एक से दो वर्ष के बीच सीखे जा सकते हैं, उपयोगी होंगे। पर इसके लिए आपको कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान जरूरी है। ई-कॉमर्स के क्षेत्र में कंप्यूटर ज्ञान के अलावा भी ऐसे च्यक्तियों की जरूरत होगी जो कि व्यापार की मूल बातों को समझें, बजट बनाने में महारत हों, विज्ञापन की दुनिया के जानकार हों, साइबर कानूनों के ज्ञाता हों इत्यादि।

 

      अत: अगर आप में इन क्षेत्रों में से किसी में भी थोड़ी सी रूचि हो तो बेशक ई-कॉमर्स को अपने रोजगार का ज़रिया बना सकते हैं। हालाकि इन क्षेत्रों में आप प्लस टू लेवल की मूल शिक्षा के बाद ही शुरूआत कर सकते हैं, मगर किसी विशेष क्षेत्र जैसे प्रोग्रामिंग में आपका तकनीकी या विज्ञान से संबंधित ज्ञान या डिग्री आपके ज्यादा काम आएगा और आपको आसानी रहेगी।

 

प्राथमिक जांच जरूरी

ई-कॉमर्स से संबंधित कोई भी कोर्स ज्वाइन करने से पहले आप निम्न बातों की तसदीक कर लें, ताकि आपको भविष्य में परेशानी न हो। हालाकि ये सिर्फ संकेत मात्र हैं, और हो सकता है कि आपको अपने निर्णय को और भी पुख्ता बनाने के लिए और भी अन्य बातों का सहारा लेना पड़े।

 

      यह अच्छी तरह तसदीक कर लें कि-

ª      आपको पढ़ाए जा रहे कोर्स में क्या-क्या सिखाया जाएगा और उसकी फीस क्या है, और कितने दिनों में सिखाया जाएगा?

ª      सिखाया जा रहा कोर्स क्या मान्यता प्राप्त है? कोशिश करें कि मान्यता प्राप्त कोर्स ही करें ताकि आपकी शिक्षा की मान्यता हो।

ª      सिखाने के समय क्या हैं ? पार्ट टाइम समय में सीख कर आप अपनी अन्य शिक्षा या रोजगार के साथ-साथ ही अपनी ई-कॉमर्स की शिक्षा पूरी कर सकते हैं।

ª      फीस की डिस्काउंट स्कीम, स्कॉलरशिप और इंस्टालमेंट की तसदीक पहले ही कर लें। हो सकता है कि किसी डिस्काउंट स्कीम से आप एक दो दूसरे महत्वपूर्ण कोर्स की पढ़ाई भी कर लें।

ª      यह भी बहुत महत्वपूर्ण है कि आप देखें कि आपको शिक्षा देने वाले खुद कितने शिक्षित हैं, आपको कंप्यूटर पर प्रयोग हेतु कितना समय मिल सकता है, शिक्षा संस्थान जॉब गारंटी देती है या नहीं, शिक्षा संस्थान में किताबों और लाइब्रेरी की क्या सुविधा है इत्यादि। वैसे प्राय: बड़े और फ्रेंचाइजी शिक्षा संस्थानों में इन सभी बातों का आवश्यक रूप से ध्यान रखा जाता है, तभी इन्हें फ्रेंचाइजी का लाइसेंस दिया जाता है।

 

    उपर्युक्त बातों से हो सकता है कि ऐसा लगे कि ई-कॉमर्स का क्षेत्र रोजगार हेतु अति उत्तम और आसान है, परंतु जब तक कि आप पूरी लगन और मेहनत से काम न करें, आप में सीखने और जानने की भरपूर चाहत न हो, और आपको दिए गए चैलेंज को समय पर पूरे करने की धुन न हो, तो थोड़ी मुश्किल तो आनी ही है। लिहाजा गंभीरता से सोच विचार कर अपने पसंदीदा ई-कॉमर्स क्षेत्र को चुनें जो निश्चित रूप से आने वाले दिनों में आपको शानदार रोजगार दिला सकता है, जो प्रतिमाह रूपये दस हजार से डेढ़ दो लाख तक भी हो सकता है। बस मेहनत और लगन आपकी है।

 

 

 

 

       'भाषा देश की एकता का प्रधान साधन है।' - आचार्य चतुरसेन शास्त्री

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  संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः गिरीश पंकज,संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, आदेश ठाकुर चित्रकारः मृत्युंजय मिश्रा

तकनीकः प्रशांत रथ