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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-3, अंक-37, जून, 2009

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। ग़ज़ल ।।

 


सहा नहीं जाता


हरिहर झा

 


आँखों में कचरा सहा नहीं जाता
परख कर धोखा चाहा नहीं जाता

भीड़ में अपनी अक्ल संभाले रखिये
बाढ़ देख नदियों में बहा नहीं जाता

नाजुक रिश्तों में मैलापन न आने दो
कतरा कर शर्मसार रहा नहीं जाता

जवानी तक बचपन संभाले रखिये
गाय छोड़ बछ्ड़ा दुहा नहीं जाता

वायरस चल पड़ा दिल के कमप्यूटर में
आया कहाँ से ये कहा नहीं जाता

भरमा न दे कोई चुपके से आकर
मुकाबले का लफ़्ज अब कहा नहीं जाता

हरिहर झा
2, बिल्बी स्ट्रीट, मोराबिन,
मेल्बर्न, आस्ट्रेलिया - 3189

◙◙◙

गीत

रवि पुरोहित

देवमणि पांडेय

ग़ज़ल

हरिहर झा

जतिन्दर परवाज़

अजयगाथा

डॉ. अजय पाठक

 

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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