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प्रेमी
सनत जैन
‘ये
चाकलेट और यह पत्र दे देना।‘
‘कुछ
कहना है क्या’
‘नहीं
जो कहना हैं वही तो लिखा है’
‘ठीक
है पहूँचा
देती हूँ।‘
उसका और उसका जो संबंध चल रहा है ( जो अब तक शुरु
नहीं हुआ है ) उसकी शुरूवात का ही प्रबंध चाहिए।
एक छत के उस कोने में,
दूसरा दूसरी छत के दूसरे कोने में
पर
पड़ोसी
जैसे रहते
हैं
।
वो एक दूसरे का इंतज़ार
कर रहे हैं
।
ज़ल्दी
ही पास-पास आ गये।
‘बात
करेंगी आप’
‘क्यों
नहीं’
‘तो
अब तक क्या हुआ था?’
‘आपको
जो हुआ’
‘ख़ैर
भूल जाओ’
‘मुँह
मीठा किया,
मीठी चीज़
खाने के बाद मीठी बातें होगी सोचता हूँ।‘
‘अभी
मुँह
मीठा नहीं हुआ,
‘मतलब कड़वी बातें
होगी
।’
खनखनाहट,
यही वो आवाज़
है जिसके लिए उसने सबकुछ छोड़ा प्रत्युत्तर में उसकी नज़रें
उसे निहारने लगी।
कुछ क्षण की चुप्पी भी काट रही है....
‘अच्छा
ला चाकलेट खाते हैं फिर बातें होगी मीठी-मीठी
।’
‘अच्छा
तो ये बात है
।'
‘हाँ
यही बात है ।’
'’पर
एक ही चाकलेट दो लोग खाएगें कैसे
?
‘प्यार
में एक ही चाकलेट तो खाई जाती है।’
‘क्या
होता है एक ही खा लेते हैं आधी-आधी
।’
वो मुस्काया,
वो भी मुस्काई।
वो चाकलेट रैपर सहित
दो टुकड़ो में तोड़ा और एक टुकड़ा ख़ुद
रखकर दूसरा उसे पकड़ा दिया।
'’लो
तुम बड़ा खाओ ।’
उसने उस प्यार को प्यार से कहा,
शायद उसे इसी पल का इंतज़ार था।
सनत जैन
सन्मति इलेक्ट्रानिक्स,
समीप दुर्गा चौक,
जगदलपुर, बस्तर - 494001
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