vbn

SRIJANGATHA.COM

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच

सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-24, मई, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। गीत ।।

 

 

गैया खूब रँभाती है

 

मेरे बाबा आओ न

मुझको गले लगाओ न

 

याद तुम्हारी आती है

मुझको बहुत सताती है

आके

दरस दिखाओ न

 

दादी-अम्मा रोती है

आँचल खूब भिगोती है

ढाँढस

उन्हें बँधाओ न

 

गैया खूब रँभाती है

बछड़ा नही पिलाती है

उसको

कुछ समझाओ न

 

टॉमी मुँह बिचकाता है

भैया मुझ चिढ़ाता है

इनको

डाँट पिलाओ न

    डॉ. अशोक गुलशन

कानूनगोपुरा, उत्तरी, बहराइच, उत्तरप्रदेश

 

◙◙◙

गीतकार

- जगत प्रकाश चतुर्वेदी

- डॉ. जगदीश सलिल

- श्रीमती मीरा शलभ

- राम अधीर

- डॉ. अशोक गुलशन

 

माह का गीतकार

- राकेश खंडेलवाल

....नाम तुम्हारा

....किसके चित्र बनाती

....वक्त की हवायें

....लड़खड़ाने लगी बाग में

....एक विधेयक-आँखों ने

 

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google