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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-24, मई, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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।। ग़ज़ल ।।

 

 

बीच सड़क पर गर्म लहू सा

 

पलकों पलकों हर चेहरे पर ठहरा रहता जाने कौन

दिल में प्यार का दरिया बनकर बहता रहता जाने कौन

 

दुनिया है इक भूल भुलैया लोग यहाँ खो जाते हैं

हर पल मेरा हाथ पकड़कर चलता रहता जाने कौन

 

कोई अब तक देख न पाया न कोई ये जान सका

हर पत्थर में हर ज़र्रे में उभरा रहता जाने कौन

 

कभी किसी मासूम के दिल में ख़ूनी ख़ंज़र उतरा है

बीच सड़क पर गर्म लहू सा बिखरा रहता जाने कौन

 

अक्सर जब तनहा होता हूँ रात के गहरे साए में

उम्मीदों का दीपक बनकर जलता रहता जाने कौन

   देवमणि पांडेय

ए-2, हैदराबाद एस्टेट, मालाबार हिल,

नेपियन सी रोड, मुम्बई - 400 036

◙◙◙

 

ग़ज़लकार

माह के ग़ज़लकार - द्विजेन्द्र द्विज

- ख़ौफ़ आँखों में समंदर..

- शहर से छिन जाएगी..

- इक ऩजर में समंदर...

- बच्चा खो गया...

- हमेशा आईना पूछे...

 

देवमणि पांडेय

- बीच सड़क पर गर्म लहू सा

- और कोई कल जाएगा

- मेरा आसमान मिले

- आना जाना भूल गए

 

प्राण शर्मा

- ये वो पंछी है

- पंछी परों से हीन हो

 

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