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युएसए
का प्रवासी साहित्य
परिचितों के बीच
सौमित्र
सक्सेना
कल्ले
लोग वाट्स अप ब्रदर को वास्स् ऽऽ अप ब्रो और यू मदरफकर को यों
मऽ फका ऽ ऽ बोलते हैं।
वो आधी बात फेफड़ों में खो देते हैं और
बाक़ी
की कहानी शरीर हिलाके पूरा करते हैं।मैं
जिन इलाकों में भी जाता
हूँ
उनमें ये
ज़रूर
मिलते हैं।
कभी परेशान हालत दिखते हुए सडक़ पे रोक के सऽ यू गोटाऽ कौएऽ
(सर
हैव यू गौट अ कौएन )
कहके भीख माँगते हैं कभी अंधेरे में तमन्चा दिखाके
लूट
लेते हैं
।
मैं रात-विरात
ऐसी जगह
फँस
चुका हँ
।एक
बार एक लम्बे चौडे क़ल्ले ने बिना कुछ पूछे मूँह पर मुक्का दे
मारा था एक
दफ़े
एक गुस्से में चीखकर दुकान के शीशे पर थूक के चला गया था
।
यहाँ बहुत से मक्कू भी हैं।
इनकी
आँखें
अजीब-सी
होती हैं
।
भवें बालों का स्टाइल कलमें और चेहरे पर एक दो जगह विचित्र सा
भराव ये बता देता है कि ये मैक्सिको के वासी हैं और अमरीका का
सारा लेबर सम्हालने का भाग्य लिखाकर आएँ
हैं
वहाँ से
।
चिन्की अपने चीनी ब्रो बहुत मतलबी होते हैं।
अपने काम से काम
।
पढने-लिखने
आते हैं यहाँ
।
नौकरी के लिए इन्हें यहाँ कोई नहीं बुलाता
।
सिंगल एंट्री वीसा मिलता है
।
एक बार आ गए तो बरसों-बरस
वापस नहीं जा पाते।
चायनीज रेस्ट्रा मे दोपहर को बफे और रात में अपनी छोटी-छोटी
आँखों
वाली औरतों के साथ पार्क में टहलना।
चिन्की लोगों के बच्चे बहुत प्यारे होते हैं।
जब किसी चिन्की औरत को सब्जी वाले स्टोर में बच्चागाडी क़े साथ
मैं देख लेता हूँ तो पास जाके देखने लगता हूँ।
मुझे वो बच्चे देखने लायक लगते हैं कल्ले लोगों के बच्चों की
तरह नहीं जो शैशव में भी अपनी उपस्थिति से कोई भली तस्वीर नहीं
खडी करते।
मैं पटेल हूँ।
गुजराती हूँ।
छः साल पहले कनाडा से चोरी-छिपे
अमरीका चला आया था।चौतीस
बरस की
ज़िंदगी
जी चुका हूँ।
दस-
ग्यारह साल पहले ब्याह हुआ था
।
बीबी तीनों बच्चों के साथ अहमदाबाद में रहती है और मेरे महीने
दो महीने पे भेजे दो-चार
सौ डालर देखके खुश रहती है।
यहाँ दक्षिण शिकागो के कल्लों वाले एरिया में छः बरस से इस गैस
स्टेशन पर काम कर रहा हूँ।
न वापस जा सकता न किसी को बुला सकता।
बाक़ी
सब तो ठीक है पर घर परिवार से दूर रहना बहुत खलता है।
वैसे भी ये बहुत कठिन जगह है।खाने-पीने
को मिल जाता है पर
हफ़्ता भर काम न करो तो सब
ख़तम।उसपर
चारों
तरफ़
ये रंग-बिरंगे
लोग
।
सारे वक़्त मन अपने वालों को तरसता है।
बाक़ी
सबको झेल लेता हूँ पर कल्लों को देखके मेरे अंदर आग लग जाती है।
मैं हमेशा सोचता हूँ कि कितना अच्छा होता जो भगवान ने मुझे
गोरा बनाया होता।
मैं छोटे-छोटे
बाल रखता उनमें जैल लगाता।
काला टक्सीडो पहनता।
सफेद कमीज़
चटक लाल टाईं फुनगीवाले
जूते और डायमंड रिंग के साथ मेरी कसरत की हुई बाडी कैसी दिखती
।
फिर एक खुली छत और चमडे क़ी सीट वाली मर्सीडीज गाडी में चमकीला
सफेद गाउन पहनी गोरी के साथ शहरभर में घूमता और भरे बाज़ार
सबकी
नज़रों
के सामने उसे होठ से होठ लगाकर चूमता
।
कभी-कभी
मुझे इस बात पे भी बहुत गुस्सा आता है कि भगवान ने सबको गोरा
ही क्यों नहीं बनाया।
सारी दुनिया कितनी सुंदर होती तब
।
सब्जी की दुकान पे काम चलाउ चित्र वाले चिन्की बच्चों की जगह
हर जगह गोरी औरतों के साथ सब कोणों से देखने लायक वाले बच्चे
होते।
ऐसा चित्र बनते ही मेरी ममता जाग उठती है।
मुझे छः साल पहले देखे अपने तीनो बच्चों के चेहरे याद आते हैं।
सबसे बडा वाला तो खूब गोरा चिट्टा था।
छोटे वाले का कलर मुझे ध्यान नहीं रहा।
वो बहुत छोटा था जब मैं बाहर आ गया था।
पर बीच वाली लडक़ी का रंग बहुत ही गिरा हुआ था
।
उसके पैदा होने पर पत्नि ने कहा था कि भगवान इसका ब्याह कैसे
होगा।
उस वक़्त मेरे मन में आई थी कि उसे पलट के बोल दूँ तू कौन बहुत
गोरी है जो इसकी चिन्ता कर रही है।
जैसे तेरी हो गयी वैसे इसकी भी हो जायेगी
।
पर मैंने उसे कुछ कहा नहीं
।
मैं चोट लगने वाली बातें किसी से नहीं कहता
।
ये सारी बातें मेरे भीतर इकट्ठी होकर
बहुत दिन तक बैठी रहती हैं।
कोनी रीड से मेरी मुलाकात उसी गैस स्टेशन पे हुई थी।
वो यहाँ सफाई करने आती थी।
कल्लन थी।
मोटी तगडी।
लहीम शहीम।बडी-बडी
आँखें।
लाल लिपिस्टिक पुते होठ।
उसकी भारी छाती पर ध्यान जाते ही मैं घबरा जाता था।
उसके पैरों और जाँघों का अनुमान करते व़क्त
मुझे लगता था कि यदि मेरे जैसा दुबला छोटा आदमी हो तो सम्भोग
के वक़्त ये उसे निचोडक़र कुचलदे रख दे।
वो जीन्स और टीशर्ट पहनती थी।
सिर पे एक लाल स्कार्फ
।
चमडे क़ी जरसी और स्पोट्र्स शूज।
वो एक पुरानी टोयोटा से आती थी।
उसकी
क़मर
की बेल्ट में एक बडा-सा
वाकी-टॉकी
खुसा रहता और दर्जनों चाबियों से लदा एक बडा सा गुच्छा।
गाडी से उतरते ही वो
वाकी-टॉकी
पे बात करना शुरू हो जाती।
मुझे समझ में नहीं आता था कि एक जमादारिन को वॉकी-टॉकी
की क्या
ज़रूरत
है।
टायलेट बाथरूम साफ करने के लिए उसे किससे घंटे-घंटे
पर गेमप्लान लेना पडता है और कहाँ सूचनाएँ दर्ज़
करानी पडती हैं।
टायलेट भी ऐसे चिकने साफ कि मेरे जैसा देसी को वहाँ बैठके
ड्राइंगरूम
में होने का गुमान हो जाए।
पर वो
रोज़
दो बार सारे बाथरूम साफ करती थी।
उसके पास एक बडा सी
ड्रमनुमा
बाल्टी थी।
उस बाल्टी के मुँह पर एक गोल रेलिंग बनी हुई थी।
उस रेलिंग में बहुत से खाँचे थे।
उन खाँचों में बहुत से क्लीनर डिटरजेंट स्प्रे और फ्रैशनर्स
सजे रहते।
बाल्टी
के भीतर बहुत से पेपर टाबल्स और टॉयलेट रोलों की गड्डियाँ भरी
रहती।
मैं कई बार कल्पना करता था कि वो अंदर जाके क्या करती होगी।
पहले शायद रोल जाँचती हो।
फिर हाथ सुखाने की मशीन के बने खाने में कागज की तौलियाँ
भर देती होगी।
टॉयलेट
की सीट पर तो सेंसर लगा हैं
।
आदमी जैसे ही उठता है पानी अपने चल जाता है।
एक दहाड क़ी
आवाज़
के साथ सारी गंदगी पाताल में गुम।
तो उसमें वो अपना क्या योगदान देती होगी।
मैं फिर सोचने लगता कि अपने यहाँ की जमादारिनें क्या-क्या
नहीं साफ करती हैं।
कैसी गंदगी में खडी होती हैं।
मैं पलभर
भावुक होके सोचने लगता कि काश हमारे यहाँ के जमादारों को
ऐसे
गैजेट्स और उपकरण उपलब्ध हो जाए तो भारत देश का कितना भला होगा।
मेरी बारह घंटे की शिफ्ट होती थी।
गैस स्टेशन बडा था।उसमें
पॅट्रोल
पम्प के साथ एक छोटा स्टोर और एक काफी शॉप भी थी।ये
कल्लों
का इलाका था।
यहाँ बडे-बडे
शरीर वाले कल्ले अपने
लहज़े
में मऽ फकाऽऽ करते घूमते रहते थे।
रात भर बीयर और कंडोम खरीदने वालों की लाइन लगी रहती।
जिस दिन रात की शिफ़्ट
होती उस रात एक के बाद एक कंडोम के पाकेट नोंचते-नोंचते
मैं बेचैन हो उठता था।
पहले आया था तो अंग्रेज़ी
भी ठीक से नहीं आती थी।
उसपर ये लोग आधा शब्द
मुँह
में ही खा लेते।
कोनी की भाषा भी ऐसी ही थी पर कोनी बहुत कम बोलती थी।
एक
रोज़
शिकागो में खूब वर्फ़
पडी।
शहरभर में सडक़ों पर
वर्फ़
के ढेर लग गए।सारा
ट्रैफ़िक
अवरूध्द हो गया।
मेरी उस दिन रात की
शिफ़्ट
थी।
सो मुझे कहीं नहीं जाना था।
कोनी को पता नहीं क्यों आज देर हो गयी थी सो वो अभी तक रूकी हुई
थी।
कोनी ने मशीन से दो कप कॉफी निकाली और शीशे से पोर्क चिप्स एक
पैकेट उठाके मेरी
तरफ़
चली आई।
मैं इस प्रश्न में उलझने वाला था कि ये मेरी
तरफ़
यूं क्यों आ रही हैं।
इतने में उसने पोर्क चिप्स का खुला हुआ पैकेट मेरे आगे कर दिया।
मैं ने बिना समझे सोचे उसमें से दो टुकडे उठाए और मूँह में रख
लिए।
जैसे ही वो नमकीन सुअर का टुकडा मेरे हलक में उतरा।
मेरे
फेफड़ों
से ज़ोर से एक भद्दी दहाड निकली और
तेज़
धार के साथ उलटी होने लगी।
जितनी देर में मैं
ख़ुद को
सम्हालता उतनी देर में कोनी ने मोर्चा सम्हाल लिया था।
उसने ज़ोरसे मुझे पकड लिया और मेरे शरीर को आगे झुकाके पीठ सहला
दी।
फिर चटपट अपनी
ड्रमनुमा
बाल्टी
ले आई और एक मैकेनिकल पोंछे से गंदगी को फट से सोख लिया।
फिर डिस्इंफैक्टैंट छिडक़के उसे एसा पोछ दिया कि फर्श की एक एक
हिस्सा निर्मल चमकने लगा।मैं
अभी सुअर का माँस चखने की ग्लानि से उभर ही रहा था कि एक
विचित्र अनुभुति हुई।कोनी
का स्पर्श उतना खराब नही था।
कोनी ने मुझसे दक्षिणी
लहज़े
की
अँग्रेज़ी
में कहा-
'
यू शुड हैव टोल्ड मी दैट यू डोन्ट ईट मीट'
(तुम्हे
मुझे बता देना चाहिए था कि तुम माँस नहीं खाते हो)
'
नो नो आई टेक मीट बट ओनली चिकिन गोट मीट ।'
(नहीं
नहीं मैं माँ खाता हूँ पर केवल मुर्गे और बकरे का)
'सो
यू डोन्ट ईट पोर्क । इज दिस इन योर रिलीजन।'
(तो
तुम सुअर का माँस नहीं खाते हो।
क्या ऐसा तुम्हारे धर्म में है
)
'नो
जस्ट पोर्क इज डरटी।'
(नहीं
बस सुअर गंदा होता है)
मुझे लगा कि मुझे उसके सामने पोर्क को गंदा नहीं कहना चाहिए था।मैं
बात सम्हालने के लिए बोला-
'हेयर
पोर्क इज नॉट बैड बट इन माई कंट्री द अनीमल लिब्स इन डरटी
प्लासिस ।'
(यहाँ
का सुअर बुरा नहीं है पर मेरे मुल्क में ये जानवर गंदी जगहों
में पलता है)
'आर
यू ओके नाव।'
(क्या
अब तुम ठीक हो)
'येस
आइ एम फाइन।'
(हाँ
अब मैं ठीक हूँ)
'दिस
स्नो सक्स । माइ कार इज नॉट स्टार्टिंग अप। आइ काल्ड द कैब बट
डोन्ट नो हाव लौंग इट्स गौना टेक।'
(ये
वर्फ़
बहुत खराब है
।
मेरी कार चालू नहीं हो रही है।
मैंने टैक्सी बुलाइ है पर नहीं जानती वो कितना
वक़्त लेगी]
'यू
डिड नॉट काल्ड अनीबडी इन फैमिली'
(तुमने
घर से किसी को नहीं बुलाया)
'माइ
फोक्स डोन्ट लिव हेयर। आइ एम सिंगल । हाव अबाउट यू फठेल।'
(मेरी
घरवाले यहाँ नहीं रहते।
मैं अकेली हूँ।
तुम्हारा क्या है पटेल)
मैंने उस
वक़्त
सोचा नहीं था कि मैं उसे ये जवाब
दूँगा
।मेरे
मुँह
से निकला-
'आइ
एम आलसो सिंगल'
(मैं
भी अकेला ही हूँ)
'हाव
ओल्ड आर यू'
(तुम्हारी
क्या उम्र होगी)
'28'
मैंने फिर झूठ बोला।
'एन्ड
यू'
(और
तुम)
'आइ
एम
24'
(मैं
24 की हँ)
उसके शरीर से उसकी उम्र का कोइ मेल नहीं था।
मुझे यकायक एक जवान
लडक़ी से बातचीत में लिप्त होने पर भीतरी गुदगुदी हुई।
'आर
यू वेरी रिलिजियस। यू हैव सो मैनी पिकचर्स ऑफ योर गॉड इन हेयर'
(क्या
तुम बहुत धार्मिक हो।
तुम्हारे पास कितनी भगवान की तस्वीरे लगी हैं यहाँ।)
मैं अपने चारों
तरफ़
की तस्वीरों पर
नज़र
डाली और हामी भर
दी।
मैं क्षण भर
में
ख़ुद को
वेरी रिलीज़ियस
समझने लगा।
तभी कैब वाले ने हॉर्न दिया और कोनी मुझे एक मुस्कान देके बाहर
निकल गयी।
उसका पोर्क चिप्स का पैकेट वहीं छूट गया था।
मैंने एक घृणित दृष्टि से उसे देखा।
फिर मुझे कोनी के हाथ की छाप अपने शरीर पर महसूस हुई।
मैंने धीरे से पैकेट उठाया
।
मन हुआ इसे कूडेदान में फेंक दूँ।पर
स |