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सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-22, मार्च, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। ग़ज़ल ।।

 

 

रंग-बिरंगे लोग


मुनीर बख़्श आलम

 

कितने रंग-बिरंगे लोग

मोटे-ताज़े-चंगे लोग

 

झूठ-घृणा का ज़हर वमन कर

करवाते नित दंगे लोग

 

क्या थे क्या आज हुए क्या

बेशऊर बेढंगे लोग

 

बन वज़ीर कुर्सी पर बैठे

लुच्चे और लफ़ंगे लोग

 

किसको फुर्सत सोचे उनकी

जो हैं भूखे-नंगे लोग

 

जाने राम कौन-सी मंशा

खोदें रोज़ सुरंगे लोग

                      मुनीर बख़्श आलम

जे - 149, नयी कॉलोनी, चुर्क

                   सोनभद्र, (उ.प्र.) - 231206

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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