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सृजनगाथा
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वागर्थ प्रतिपत्तये
वर्ष-2, अंक-22, मार्च, 2008
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।। ग़ज़ल ।।
रंग-बिरंगे लोग
मुनीर बख़्श आलम
कितने रंग-बिरंगे लोग
मोटे-ताज़े-चंगे लोग
झूठ-घृणा का ज़हर वमन कर
करवाते नित दंगे लोग
क्या थे क्या आज हुए क्या
बेशऊर बेढंगे लोग
बन वज़ीर कुर्सी पर बैठे
लुच्चे और लफ़ंगे लोग
किसको फुर्सत सोचे उनकी
जो हैं भूखे-नंगे लोग
जाने राम कौन-सी मंशा
खोदें रोज़ सुरंगे लोग
जे - 149, नयी कॉलोनी, चुर्क
सोनभद्र, (उ.प्र.) - 231206
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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति
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