vbn

SRIJANGATHA.COM

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच

सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-22, मार्च, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। ग़ज़ल ।।

 

 

ज़िंदगी का निचोड़


ख़याल खन्ना

 

यूँ तो हर शाम पे इक मोड़ मिला

दिल किसी से मगर न जोड़ मिला

 

ऐ ग़मे-यार ! हम तेरी ख़ातिर

छोड़ आये उसे, जो छोड़ मिला

 

हार थक कर ख़ुदा को मान लिया

मौत का जब न कोई तोड़ मिला

 

माँगने का भी है एक मेयार

लाख चाहा, मगर करोड़ मिला

 

दुश्मनों की कमी नहीं है 'ख़याल'

ज़िंदगी का यही निचोड़ मिला

                      ख़याल खन्ना

1090, जनकपुरी

                     बरेली, (उ.प्र.) - 243122

◙◙◙

 

 

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google