|
ज़िंदगी का निचोड़
ख़याल
खन्ना
यूँ तो
हर शाम पे इक मोड़ मिला
दिल
किसी से मगर न जोड़ मिला
ऐ
ग़मे-यार
!
हम तेरी ख़ातिर
छोड़
आये उसे, जो छोड़ मिला
हार थक कर ख़ुदा को मान लिया
मौत का जब न कोई तोड़ मिला
माँगने का भी है एक मेयार
लाख चाहा, मगर करोड़ मिला
दुश्मनों की कमी नहीं है 'ख़याल'
ज़िंदगी का यही निचोड़ मिला
ख़याल खन्ना
1090, जनकपुरी
बरेली, (उ.प्र.) - 243122

◙◙◙
|