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पिट्सबर्ग की देन
अनुराग
शर्मा
अनुराग
विज्ञान में स्नातक तथा आईटी प्रबंधन में स्नातकोत्तर हैं । एक
बैंकर रह चुके हैं और वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका में
एक चिकित्सा संस्था में इन्टरनेट ऍप्लिकेशन आकिर्टेक्ट हैं ।
उत्तरप्रदेश में जन्मे अनुराग भारत के विभिन्न राज्यों में रह
चुके हैं । फिलहाल सपरिवार पिट्सबर्ग में रहते हैं। लिखना,
पढ़ना,
बात करना यानी सामाजिक संवाद उनकी हॉबी है ।
शायद इसीलिए वे कविता,
कहानी,
लेख आदि विधाओं में सतत् लिखते रहे हैं । एक
हिन्दी काव्य संग्रह "पतझड़ सावन वसंत बहार" प्रकाशाधीन है।
वे दो वर्ष तक एक इन्टरनेट रेडियो (PittRadio)
भी चला चुके है । आजकल अपने अँगरेज़ी उपन्यास "An
Alien Among Flesh Eaters"
पर काम कर रहे हैं । उन्हें
Friends of Tibet (भारत)
एवं United Way (संयुक्त
राज्य अमेरिका) जैसे समाजसेवी संगठनों से जुड़ने का सौभाग्य
प्राप्त है। आप उन्हें
www.smartindian.com
पर भी मिल सकते हैं । हम पश्चिमी सभ्यता और
संस्कृति को समझने के लिए इस अंक से उनका नया स्तम्भ प्रारंभ
कर रहे हैं - संपादक
पिट्सबर्ग एक छोटा-सा
शहर है। सच्चाई तो यह है कि यह शहर सिकुड़ता जा रहा है।
पिट्सबर्ग ही नहीं,
अमेरिका के बहुत से अन्य शहर लगातार सिकुड़ रहे है। घबराईये
नहीं,
सिकुड़ने से मेरा अभिप्राय था जनसंख्या से। दरअसल पिट्सबर्ग
जैसे ऐतिहासिक नगरों की जनसंख्या लगातार कम होती जा रही है।
पिट्सबर्ग उत्तर-पूर्वी अमेरिका के पेन्सिल्वेनिया राज्य में
है।
१९५० में यहाँ ६७६,८०६
लोग रहते थे लेकिन २००५ के जनसंख्या आंकडों के अनुसार यहाँ
केवल ३१६,७१८
लोग रहते हैं
पिट्सबर्ग एक पुराना शहर है।
इसकी स्थापना
सन् १७५८ में हुई थी और इस नाते से इस साल यह
अपने २५० साल पूरे कर रहा है। नवम्बर १७५८ में जनरल जॉन
फोर्ब्स की अगुआई में ब्रिटिश सेना ने फोर्ट ड्यूकेन
(Fort Duquesne – S
शांत है)
के भाग्नावाशेषों पर कब्ज़ा किया और इसका नाम तत्कालीन ब्रिटिश
राज्य सचिव विलियम पिट के नाम पर रखा। पिछले वर्ष ही पिट्सबर्ग
को अमेरिका के "सबसे ज़्यादा रहने योग्य नगर" का खिताब मिला
तो यहाँ के लोग फूले नहीं समाये।
पुराने समय से ही पिट्सबर्ग अग्रणी लोगों का नगर बन कर रहा है।
चाहे वह बिंगो (ताम्बूला) का खेल हो,
कोका कोला के कैन हों या कि बड़े फेरिस वील,
इन सब की शुरुआत पिट्सबर्ग से ही हुई थी।
पहला व्यावसायिक रेडियो स्टेशन हो या पहला व्यावसायिक पेट्रोल
पम्प,
दोनों का ही श्रेय पिट्सबर्ग को जाता है।
पिछले दिनों जब
मैं
पिट्सबर्ग में बैठा हुआ पढ़ रहा था कि पोलियो की बीमारी सारी
दुनिया में ख़त्म हो चुकने के बाद भी अभी सिर्फ़ भारत में ही
बची है और वह भी मुख्यतः मेरे गृह नगरों बरेली,
बदायूं और रामपुर आदि में - तो मुझे भाग्य के इस क्रूर खेल पर
आश्चर्य हुआ क्योंकि पोलियो का टीका भी सन १९५४ में यहीं खोजा
गया था।
पिट्सबर्ग की देन असंख्य है इसलिए ज़्यादा नहीं कहूँगा मगर
स्माइली ) का ज़िक्र ज़रूर करूँगा जिसकी खोज यहाँ कार्नेगी मेलन
विश्वविद्यालय में हुई थी। विश्व का पहला रोबोटिक्स केन्द्र भी
इसी विश्वविद्यालय में प्रारम्भ हुआ।
पिट्सबर्ग के वर्तमान मेयर ल्यूक रेवेंस्ताल अमेरिका के सबसे
कम आयु के मेयर होने का दर्जा पा चुके हैं।
पिट्सबर्ग दो नदियों मोनोंगहेला व एलेगनी के संगम पर स्थित है।
चूँकि यह दोनों नदियाँ मिलकर एक तीसरी नदी ओहियो बनाती हैं
इसलिए यहाँ के निवासी इसे संगम न कहकर त्रिवेणी पुकारते हैं।
कोई आश्चर्य नहीं कि पिट्सबर्ग में आप बहुत से व्यवसायों का
नाम "तीन-नदियाँ" पायें।
तीन नदियों से घिरा होने के कारण पिट्सबर्ग में पुलों की खासी
संख्या है जिनमें से ७२० प्रमुख पुल हैं।
पुराने समय से ही अमेरिका के सर्वाधिक धनी व्यक्ति या तो
पिट्सबर्ग में व्यवसाय करते थे या इस नगर से किसी रूप में
जुड़े थे।
यहाँ कोयला,
इस्पात और अलुमिनुम का व्यवसाय प्रमुखता से हुआ। पिट्सबर्ग को
इस्पात नगरी के नाम से भी पुकारा जाता है। कहते हैं कि द्वितीय
विश्व युद्ध में जितना इस्पात इस शहर में बना उतना शेष विश्व
ने मिलकर भी नहीं बनाया।
जहाँ एक तरफ़ व्यवसाय की उन्नति हुई वहीं ज्ञान विज्ञान में भी
पिट्सबर्ग उन्नति करता रहा।
व्यवसाय ने पिट्सबर्ग को सम्पन्नता तो बहुत दी परन्तु उसकी
क़ीमत भी ली। पिट्सबर्ग देश के सर्वाधिक प्रदूषित नगरों में से
एक गिना जाता था। बहुत-सी सुंदर इमारतें कारखानों के धुएँ से
काली पड़ गयी। सत्तर के दशक में जब पर्यावरण सम्बन्धी विचारधारा
को बढावा मिला तो इस तरह के सारे प्रदूषणकारी व्यवसायों पर
प्रतिबन्ध लगने शुरू हो गए। जिसकी क़ीमत भी पिट्सबर्ग को चुकानी
पड़ी।
युवाओं ने नौकरी की तलाश में नगर छोड़ना शुरू कर दिया। नतीजा
यह हुआ कि शहर में वयोवृद्ध जनसंख्या का अनुपात युवाओं से अधिक
हो गया।
पिट्सबर्ग ने इस चुनौती को बहुत गर्व से स्वीकारा और जल्दी ही
जन-स्वास्थ्य में एक अग्रणी नगर बनकर उभरा।
पिट्सबर्ग अमेरिका का एक प्रमुख शिक्षा केन्द्र है। पिट्सबर्ग
विश्व विद्यालय,
कार्नेगी मेलन विश्व विद्यालय एवं ड्युकेने विश्व विद्यालय
यहाँ के तीन बड़े शिक्षा संस्थान हैं। अन्य शिक्षा संस्थानों
में पॉइंट पार्क विश्व विद्यालय,
चथम विश्व विद्यालय,
कार्लो विश्व विद्यालय एवं रॉबर्ट मौरिस विश्व विद्यालय प्रमुख
हैं।
खनिज,
शिक्षा एवं स्वास्थ्य के अतिरिक्त पिट्सबर्ग एक और व्यवसाय में
अग्रणी है और वह है कम्पूटर सॉफ्टवेयर। अनेकों बड़ी कम्पनियाँ
जैसे गूगल,
माइक्रोसॉफ्ट आदि ने यहाँ अपने कार्यालय बनाए हैं।
अब जहाँ चिकित्सालय हों प्रयोगशालाएँ हों,
विश्व विद्यालय हों और
सॉफ्टवेयर कम्पनियाँ भी हों और वहां पर भारतीय न हों ऐसा कैसे
हो सकता है?
।
इस नगर में ६% लोग भारतीय मूल के हैं जिनमें मुख्यतः डॉक्टर,
सोफ्टवेयर इंजिनियर,
शिक्षक एवं छात्र हैं।
एक बड़ा वर्ग व्यवसायिओं
एवं वैज्ञानिकों का भी है।
यहाँ आपको मन्दिर,
मस्जिद,
गुरुद्वारा तो मिलेगा ही,
यदि आप अपने बच्चों को भारतीय संगीत या नृत्य सिखाना
चाहते हैं
तो आपको उसके लिए भी अनेक गुरू मिल जायेंगे। इतने भारतीय हों
और भारतीय खाना न मिले,
भला यह भी कोई बात हुई। भारतीय स्टोर व रेस्तरां भी बहुतायत
में हैं जहाँ आपको हर प्रकार का भारतीय सामान,
भोजन इत्यादि मिल जायेगा।
कथीद्रल ऑफ लर्निंग पिट्सबर्ग विश्व विद्यालय
की प्रतीक इमारत है।
इसमें एक कक्ष नालंदा विश्व विद्यालय के सम्मान में बनाया गया
है ।
पिट्सबर्ग के वार्षिक लोक उत्सव ने भारतीय कला व संस्कृति का
परिचय स्थानीय लोगों को कराया है।
हमारी संस्कृति में तो आकर्षण है ही,
यहाँ के लोग भी नए विचारों को खुले दिल से स्वीकार करने वाले
हैं।
यहाँ आने से पहले मैंने अमेरिका के बारे में बहुत-सी बातें
सुनी थीं यथा,
एक सामान्य अमेरिकी जीवन में सात बार नगर बदलता है। पिट्सबर्ग
में मेरे बहुत से ऐसे स्थानीय सहकर्मी हैं जिन्होंने कभी
पिट्सबर्ग नहीं छोड़ा। कुछ तो दो या तीन पीढियों से यहीं हैं।
अनुराग
शर्मा
पिट्सबर्ग, यूएस
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