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शरद तैलंग
के
तीन बाल गीत
मेरी कितनी माताएँ हैं
?
माँ मुझको इक बात बताओ
मेरी कितनी माताएँ हैं
?
तुम कहतीं भारतमाता है,
सब कहते धरती भी माता,
गैया को भी समझें मैया,
देवी लक्ष्मी भी हैं माता ।
सीता मैया,
माँ अनुसुइया,
दुर्गा माता सिंह वाहिनी,
करुणामयी मदर टेरेसा,
माँ सरस्वती विद्या दायिनी ।
माँ मुझको यह भेद बताओ
मेरी कितनी माताएँ हैं
?
माँ बोली - सुन मेरे बेटे !
अपने बच्चों पर जिसने भी,
खुद दु:ख सहकर प्यार लुटाया,
पुत्र समान सभी भक्तों को,
जीवन का इक पाठ पढा़या,
सत्य अहिंसा की राहों में,
जिसने चलना है सिखलाया,
दीन दु:खी की सेवा करना,
अपने बच्चों को बतलाया,
वे सब तेरी माताएँ हैं ।
वे सब तेरी माताएँ हैं ।
चिड़ियों का अलार्म
सुबह-सुबह ही मेरी बगिया
चिडि़यों से भर जाती है,
उनके चीं-चीं के अलार्म से,
नींद मेरी खुल जाती है ।
वे कहतीं हैं उठो-उठो अब,
हुआ सबेरा जागो,
उठकर अपना काम करो,
झटपट आलस को त्यागो ।
मूल्यवान यह समय गवाँकर
बहुत देर जो सोते,
प्यारे बच्चों जीवन में वह,
अपना सब कुछ खोते ।
धमकी
चिड़िया के बच्चे सब मिलकर,
इक दिन लगे मचाने शोर,
हर दिन कच्चे दाने खाकर,
'मम्मी'
हम हो गए हैं बोर ।
कितने हैं पकवान जगत में
तुम क्यों नहीं खिलाती हो,
वही दाल या चावल का-
दाना लेकर आ जाती हो ।
या तो चीज़ दूसरी लाओ
हमें खिलाओ अच्छा माल,
या फिर हम मिलकर कर देंगे,
इसी समय भूख हड़ताल ।
शरद तैलंग
२४० माला रोड
कोटा जंक्शन,
राजस्थान
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