vbn

SRIJANGATHA.COM

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच

सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-3, अंक-26, जुलाई, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। बचपन ।।

 

शरद तैलंग के तीन बाल गीत

 

मेरी कितनी माताएँ हैं ?

 

माँ मुझको इक बात बताओ

मेरी कितनी माताएँ हैं ?

तुम कहतीं भारतमाता है,

सब कहते धरती भी माता,

गैया को भी समझें मैया,

देवी लक्ष्मी भी हैं माता ।

 

सीता मैया, माँ अनुसुइया,

दुर्गा माता सिंह वाहिनी,

करुणामयी मदर टेरेसा,

माँ सरस्वती विद्या दायिनी ।

माँ मुझको यह भेद बताओ

मेरी कितनी माताएँ हैं ?

 

माँ बोली - सुन मेरे बेटे !

अपने बच्चों पर जिसने भी,

खुद दु:ख सहकर प्यार लुटाया,

पुत्र समान सभी भक्तों को,

जीवन का इक पाठ पढा़या,

 

सत्य अहिंसा की राहों में,

जिसने चलना है सिखलाया,

दीन दु:खी की सेवा करना,

अपने बच्चों को बतलाया,

वे सब तेरी माताएँ हैं ।

वे सब तेरी माताएँ हैं ।

 

 

चिड़ियों का अलार्म

 

सुबह-सुबह ही मेरी बगिया

चिडि़यों से भर जाती है,

उनके चीं-चीं के अलार्म से,

नींद मेरी खुल जाती है ।

 

वे कहतीं हैं उठो-उठो अब,

हुआ सबेरा जागो,

उठकर अपना काम करो,

झटपट आलस को त्यागो ।

 

मूल्यवान यह समय गवाँकर

बहुत देर जो सोते,

प्यारे बच्चों जीवन में वह,

अपना सब कुछ खोते ।

 

 

धमकी

 

चिड़िया के बच्चे सब मिलकर,

इक दिन लगे मचाने शोर,

हर दिन कच्चे दाने खाकर,

'मम्मी' हम हो गए हैं बोर ।

 

कितने हैं पकवान जगत में

तुम क्यों नहीं खिलाती हो,

वही दाल या चावल का-

दाना लेकर आ जाती हो ।

 

या तो चीज़ दूसरी लाओ

हमें खिलाओ अच्छा माल,

या फिर हम मिलकर कर देंगे,

इसी समय भूख हड़ताल ।

    शरद तैलंग

२४० माला रोड
कोटा जंक्शन
, राजस्थान

◙◙◙

 

 

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google