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डॉ. राजेन्द्र सोनी की दो कविताएँ
ताकतवर
मुझे मालूम है
मेरे दोस्त
तुम सूरज बनकर
पूरे विश्व को
प्रकाशवान कर सकते हो
चंद्रमा बनकर
शीतलता प्रदान कर सकते हो
किन्तु मैं चाहता हूँ
मेरे दोस्त
तुम
सूरज और चंद्रमा से भी ज़्यादा
ताकतवर बनो
ताकि
भ्रष्ट्राचार से बने
महलों में आग लगा सको
देखना चाहता हूँ
एक बच्चा चिलचिलाती धूप में
तप रहा है तवे में
रोटी की तरह
एक बच्चा कड़कड़ती ठंड़ में
जम रहा है
बर्फ़ की तरह
मैं उन दोनों बच्चों के बीच
छतरी बनकर तन जाना चाहता हूँ
कथरी बनकर ढँक जाना चाहता हूँ
और
देखना चाहता हूँ कि
उन दोनों बच्चों के बीच
जो देश बनेगा
वह कैसा होगा
कैसा होगा ?
डॉ. राजेन्द्र
सोनी
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