vbn

SRIJANGATHA.COM

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच

सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-23, अप्रैल, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। कविता ।।

 

 

गौरैया

 

चाय की चुस्कियों के बीच

सुबह का अख़बार पढ़ रहा था

ज़रें ठिठक गईं

गौरैया शीघ्र ही विलुप्त पक्षियों में।

 

गौरैया,

जो हर आँगन में

घोंसला लगाया करती

जिसकी फुदक के साथ

हम बड़े हु

 

क्या हमारे बच्चे

इस प्यारी व नन्हीं-सी चिड़िया को

देखने से वंचित रह जायेंगे!

न जाने कितने ही सवाल

दिमाग में उमड़ने लगे

 

बाहर देखा

कंक्रीटों का शहर नज़र आया

पेड़ों का नामोनिशां तक नहीं

अब तो लोग घरों में

ऑंगन भी नहीं बनवाते

एक कमरे के फ़्लैट में

चार प्राणी ठुँसे पड़े हैं

 

बच्चे प्रकृति को

निहारना तो दूर

हर कुछ इंटरनेट पर ही

गालना चाहते हैं।

 

आख़ि

इन सबके बीच

गौरैया कहाँ से आयेगी?

   कृष्ण कुमार यादव

वरिष्ठ डाक अधीक्षक

कानपुर नगर मण्डल, कानपुर (उ0 प्र0) - 2080011

  ◙◙◙

 

माह के कवि

 

- ई-पार्क

- गौरेया

- गुर्दा

-  पेज थ्री

- रिश्तों का अर्थशास्त्र

- विज्ञापनों का गोरखधंधा

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google