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गौरैया
चाय की चुस्कियों के बीच
सुबह का अख़बार
पढ़ रहा था
नज़रें
ठिठक गईं
गौरैया शीघ्र ही विलुप्त पक्षियों में।
गौरैया,
जो हर
आँगन
में
घोंसला लगाया करती
जिसकी फुदक के साथ
हम बड़े हुए
क्या हमारे बच्चे
इस प्यारी व नन्हीं-सी चिड़िया को
देखने से वंचित रह जायेंगे!
न जाने कितने ही सवाल
दिमाग में उमड़ने लगे
बाहर देखा
कंक्रीटों का शहर नज़र
आया
पेड़ों का नामोनिशां तक नहीं
अब तो लोग घरों में
ऑंगन भी नहीं बनवाते
एक कमरे के
फ़्लैट
में
चार प्राणी ठुँसे
पड़े हैं
बच्चे प्रकृति को
निहारना तो दूर
हर कुछ इंटरनेट
पर ही
खँगालना
चाहते हैं।
आख़िर
इन सबके बीच
गौरैया कहाँ से आयेगी?
कृष्ण कुमार यादव
वरिष्ठ डाक
अधीक्षक
कानपुर नगर मण्डल,
कानपुर (उ0
प्र0)
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2080011
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