vbn

SRIJANGATHA.COM

साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच

सृजनगाथा

 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-23, अप्रैल, 2008

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। गीत ।।

 

 

प्रतिकार करूँगा

 

ओ वैभव की मूढ़ रंजना,

मैं तेरा प्रतिकार करूँगा ।

 

रह ले चाहे राजभवन में,

विचरण कर ले आज गगन में ।

स्वर्णाभूषण, राजमुकुट या

रानी के विन्यास वसन में ।

 

धर्म आचरण से भटकी तो,

क्या तेरा सत्कार करूँगा ?

 

तुझको तेरी माया प्यारी,

इधर रोटियों की लाचारी ।

तेरे मिथ्या आडंबर पर,

होती मानवता बलिहारी ।

 

इसका शोषण किया कभी तो,

मैं तेरा संहार करूँगा ।

 

शोणित से उपजी हरियाली

सींच रहे सब डाली-डाली

श्रम से पिचके अधर-गाल की,

क्षीण हुई जाती है लाली ।

 

इनके हक में क़लम चलाकर,

तीखी उसकी धार करूँगा ।

 

सद्भावों के दीप जलाये,

विस्मृत को रस्ता दिखलाये ।

दीन-हीन की बातें सुनकर,

उनके घावों को सहलाये ।

 

अगर कहीं यह कर पायी तो,

तेरी जय-जयकार करूँगा ।

     डॉ. अजय पाठक

 लेन-3, विनोबा नगर,

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) - 495001

  ◙◙◙

 

गीतकार

- माह के गीतकार - डॉ. अजय पाठक

- आँसू का इतिहास

- रात गहरी है

- मौसम विद्रुप

- प्रतिकार करूँगा

- देहरी पर दीप रख दो

- ओम निश्चल

- डॉ. तारादत्त निर्विरोध

- नारायण लाल परमार

-  मयंक श्रीवास्तव

- डॉ. महेन्द्र भटनागर

 

 

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google