 |
पहली उड़ान ले तो सही
हाँ
धुआँ
है कहाँ
आग जान ले तो सही।
फिर उसके
बाद ही मेरे बयान ले तो सही।
वो चाहता है कि मैं उसको मान लूँ
तो सही,
मैं कह रहा
हूँ
कि तू मुझको जान ले तो सही।
तू मुझसे रूठ गया है तो बात
मत कर ना,
जो पान लाया हूँ
लाले की जान ले तो सही।
हर एक बार ज़्यादा
ही
खरा उतरूँगा,
तू बार-बार मेरा इम्तहान ले तो सही।
आसमां,
धूप, छाँव
और
बहुत चीज़ें
हैं,
तू अपने पँख
से पहली उड़ान ले तो सही।
प्रताप सोमवंशी
स्थानीय संपादक,
अमर उजाला,
हिंदी दैनिक
८९,
इंडस्ट्रियल
इस्टेट,
फजलगंज,
कानपुर
◙◙◙
|