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एक और बड़े युद्ध की
साज़िश
तनवीर
जाफ़री
पूरा
विश्व आज मँहगाई व भुखमरी के उस दौर से गुज़र रहा है जिसकी
पहले कभी कल्पना भी नहीं की गई थी। इसी मँहगाई का सीधा संबंध
विश्व में दिन-प्रतिदिन तेज़ी से फैलती जा रही अराजकता से भी
है। इसके अतिरिक्त कच्चे तेलों की निरंतर हो रही भारी
मूल्यवृद्धि भी बढ़ती मँहगाई व आम लोगों की बदहाली की एक ख़ास
वजह मानी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने पहली बार इस विषय
पर अपनी गंभीर चिंता जताई है तथा विश्व से मँहगाई के
परिणामस्वरूप उपजे खाद्यान संकट से जूझने के लिए विशेष योजना
पर अमल करने की बात कही है। इस मानवीय कार्य हेतु संयुक्त
राष्ट्र संघ ने बहुत बड़ी पूँजी की भी ज़रूरत जताई है। ऐसा नहीं
है कि मँहगाई अथवा खाद्यान संकट या मुद्रा के अवमूल्यन का
शिकार केवल ग़रीब या विकासशील देश ही हों। बल्कि दुनिया का
सबसे शक्तिशाली व आर्थिक रूप से सबसे सुदृढ़ समझा जाने वाला देश
अमेरिका भी इस वर्तमान वैश्विक त्रासदी का शिकार है। कहा जा
रहा है कि अमेरिका इस समय अब तक की सबसे बड़ी मंदी का सामना कर
रहा है। अमेरिकी डॉलर में भारी गिरावट देखी जा रही है। मँहगाई
व बेरोज़गारी भी अमेरिका में अपने रिकॉर्ड स्तर को छू रही हैं।
कुछ विशेषज्ञों का तो यहाँ तक कहना है कि दुनिया में पैदा होने
वाले इन सभी चिंताजनक हालात के लिए अमेरिका विशेषकर राष्ट्रपति
जॉर्ज डब्ल्यू बुश की नीतियाँ ही ज़िम्मेदार हैं।
अमेरिका द्वारा इराक़ पर अकारण थोपा गया युद्ध
तथा इसका लगातार और लम्बा खींचा जाना दुनिया के बिगड़ते हालात
का एक प्रमुख कारण है। यहीं से कच्चे तेल की क़ीमतों में
बेतहाशा बढ़ोत्तरी की शुरुआत होती है। इसके अतिरिक्त अमेरिका
द्वारा खाद्यान से ईंधन तैयार किए जाने के प्रयास के
परिणामस्वरूप भी भारी मात्रा में खाद्यान का संकट उत्पन्न हो
गया है। परन्तु इन सभी ज़मीनी हालात से बेख़बर राष्ट्रपति बुश
लगता है कि अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले एक और बड़ा ख़ूनी
खेल खेलना चाह रहे हैं। एक ओर तो शांतिदूत नेल्सन मंडेला अपनी
90वीं वर्षगांठ पर संसार से ग़रीबी दूर
किए जाने का आह्वान कर रहे हैं। मंडेला उन देशों की सहायता
करने की अपील हैं जो देश ग़रीबी व भुखमरी से मुक़ाबला कर पाने
में सक्षम नहीं हैं। परन्तु दूसरी ओर राष्ट्रपति बुश जाते-जाते
परमाणु हथियारों जैसा भयावह खेल खेलने की योजना बना रहे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इज़राईली सेनाओं से कहा है कि
वे आवश्यकता पड़ने पर ईरान के परमाणु ठिकानों पर मिसाईल हमला
करने से हरगिज़ न हिचकिचाए। बुश ने इज़राईल को ईरान के विरुद्ध
युद्ध के लिए प्रेरित करते हुए कहा है कि वह हर तरह से इज़राईल
के साथ है। बात केवल जॉर्ज बुश के इस भड़काऊ बयान तक ही सीमित
नहीं है बल्कि इज़राईल द्वारा इराक़-ईरान सीमा के निकट पड़ने
वाले उन इराक़ी सैन्य ठिकानों को भी अपने प्रयोग में लाया जा
रहा है जो कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों के रूप में प्रयोग हो रहे
हैं तथा ईरान में कहीं भी मार कर पाने में सहायक सिद्ध हो सकते
हैं। ऐसे में जॉर्ज बुश द्वारा इज़राईली सेना को ईरानी परमाणु
ठिकानों पर हमला करने हेतु तैयार रहने का आह्वान करना निश्चित
रूप से दुनिया के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। जॉर्ज
बुश का यह बयान ईरानी सेना द्वारा किए गए मिसाईल परीक्षण के
कुछ ही दिनों बाद आया है। ज्ञातव्य है कि ईरान ने अभी कुछ
दिनों पूर्व ही मिसाईल परीक्षण किए थे। इस परीक्षण के लिए ईरान
ने स्पष्ट किया था कि ईरान द्वारा किए जाने वाले ऐसे मिसाईल
परीक्षण अमेरिका व इज़राईल की ओर से निरंतर मिलती रहने वाली
सैन्य चुनौतियों की प्रतिक्रिया मात्र है। इन परीक्षणों को
खाड़ी देशों के लिए ख़तरा अथवा चेतावनी नहीं समझा जाना
चाहिए।
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