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डॉ. महेंद्र
भटनागर
जन्म-
२६ जून, 1926 झाँसी (उ.प्र)शिक्षा-एम.ए.पी-एच.डी.
नागपुर विश्वविद्यालय से।
उच्च शिक्षण संस्थानों में
सेवा, अब सेवानिवृत।
लब्ध-प्रतिष्ठ प्रगतिवादी कवि।
हिन्दी और
अंग्रेजी में समान रूप से लेखन ।
सन् १९४१ से काव्य-रचना आरम्भ। ’विशाल
भारत‘, कोलकाता (मार्च १९४४) में प्रथम
कविता का प्रकाशन। अब तक 20 कृतियाँ प्रकाशित । प्रमुख
कृतियाँ-
तारों के गीत, टूटती श्रृंखलाएँ, बदलता युग, अभियान, अंतराल,
विहान, नई चेतना आदि । समग्र 6 खंड़ों में प्रकाशित । कविताएँ
अंग्रेजी,
फ्रेंच,
चेक एवं अधिकांश भारतीय भाषाओं में अनूदित व
पुस्तकाकार प्रकाशित। संपर्क- 110, बलवान नगर, गांधी
मार्ग, ग्वालियर, मध्यप्रदेश - 474002
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अपेक्षा
कोई तो हमें चाहे
गाहे-ब-गाहे!
निपट सूनी
अकेली ज़िन्दगी में,
गहरे कूप
में बरबस
ढकेली ज़िन्दगी में,
निष्ठुर घात-वार-प्रहार
झेली ज़िन्दगी
में,
कोई तो हमें चाहे,
सराहे!
किसी की तो मिले
शुभकामना-सद्भावना!
अभिशाप झुलसे लोक
में
सर्वत्र छाये शोक में
हमदर्द हो
कोई
कभी तो!
तीव्र विद्युन्मय
दमित
वातावरण में
बेतहाशा गूँजती जब
मर्मवेधी
चीख-आह-कराह,
अतिदाह में जलती
विध्वंसित ज़िन्दगी
आबद्ध
कारागाह!
ऐसे तबाही के क्षणों में
चाह जगती है
कि
कोई तो हमें चाहे
भले,
गाहे-ब-गाहे!
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कविताएँ
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तुलना
अपेक्षा
हवा
अवधूत
प्रयोगरत
मइस
अंक के कवि
डॉ. बलदेव
वंशी
पवन करण
सुभाष नीरव
हीरामन
सिंह ठाकुर
प्रवासी कवि
शकुंतला बहादुर
अजय त्रिपाठी
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संपादकः
जयप्रकाश मानस
संपादक मंडलः
डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा,
डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति
तकनीकः
प्रशांत रथ |