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।।सृजनगाथा।।

 

  ई-पताः srijangatha@gmail.com

वर्ष- 2, अंक - 17, अक्टूबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 माह के कवि

 डॉ. महेंद्र भटनागर

जन्म- २६ जून, 1926 झाँसी (उ.प्र)शिक्षा-एम.ए.पी-एच.डी. नागपुर विश्वविद्यालय से। उच्च शिक्षण संस्थानों में सेवा, अब सेवानिवृत। लब्ध-प्रतिष्ठ प्रगतिवादी कवि हिन्दी और अंग्रेजी में समान रूप से लेखन । सन् १९४१ से काव्य-रचना आरम्भ। विशाल भारत‘, कोलकाता (मार्च १९४४) में प्रथम कविता का प्रकाशन। अब तक 20 कृतियाँ प्रकाशित । प्रमुख कृतियाँ- तारों के गीत, टूटती श्रृंखलाएँ, बदलता युग, अभियान, अंतराल, विहान, नई चेतना आदि । समग्र 6 खंड़ों में प्रकाशित । कविताएँ अंग्रेजी, फ्रेंच, चेक एवं अधिकांश भारतीय भाषाओं में अनूदित व पुस्तकाकार प्रकाशित। संपर्क- 110, बलवान नगर, गांधी मार्ग, ग्वालियर, मध्यप्रदेश - 474002

 

 

अपेक्षा

कोई तो हमें चाहे
गाहे-ब-गाहे!
निपट सूनी
अकेली ज़िन्दगी में,
गहरे कूप में बरबस
ढकेली ज़िन्दगी में,
निष्ठुर घात-वार-प्रहार
झेली ज़िन्दगी में,
कोई तो हमें चाहे, सराहे!
किसी की तो मिले
शुभकामना-सद्‍भावना!
अभिशाप झुलसे लोक में
सर्वत्र छाये शोक में
हमदर्द हो

कोई कभी तो!
तीव्र विद्युन्मय
दमित वातावरण में
बेतहाशा गूँजती जब
मर्मवेधी
चीख-आह-कराह,
अतिदाह में जलती
विध्वंसित ज़िन्दगी
आबद्ध कारागाह!
ऐसे तबाही के क्षणों में
चाह जगती है कि
कोई तो हमें चाहे
भले, गाहे-ब-गाहे!

 ◙◙◙

कविताएँ

[\

तुलना

अपेक्षा

हवा

अवधूत

प्रयोगरत

इस अंक के कवि

डॉ. बलदेव वंशी

पवन करण

सुभाष नीरव

हीरामन सिंह ठाकुर

प्रवासी कवि

शकुंतला बहादुर

अजय त्रिपाठी

 

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

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