साहित्य, संस्कृति व भाषा का अंतर्राष्ट्रीय मंच                                                                             SRIJANGATHA

।।सृजनगाथा।।

 

  ई-पताः srijangatha@gmail.com

वर्ष- 2, अंक - 17, अक्टूबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

  कविता

डॉ. अजय त्रिपाठी दो कविताएँ

रिश्ते

नोचते हैं खसोट लेते हैं

दबे पाँव आ कर दबोच लेते हैं

रात सोने भी नहीं देते हैं मुद्दत ग़ुज़री

ख़ौफ़ज़दा मुझ को ये कर देते हैं

ज़रा सा गोश्त जो बाक़ी है जिस्म पर मेरे

लिए वो हाथ में ख़ंजर खुरचने आते हैं

मुझे मेरी ही निग़ाहों में गिरा कर फिर वो

ऐसे मिलते हैं जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं

रिश्ते भी अजीब होते हैं

◙◙◙

 

सपने

सपने

कुछ कच्चे

कुछ पक्के सपने

कुछ झूठे

कुछ सच्चे सपने

बारिश की अल्हड़ बूँदों से

नन्हें से

मासूम से सपने

धरती की सच्चाई से टकरा टकरा कर

बिखर हमेशा ही जाते हैं सारे सपने

आखिर क्यों

  डॉ. अजय त्रिपाठी

बर्मिंघम, यु.के.

◙◙◙

 

 इस अंक के कवि

डॉ. बलदेव वंशी

पवन करण

सुभाष नीरव

हीरामन सिंह ठाकुर

माह के कवि

डॉ. महेंद्र भटनागर

प्रवासी कवि

शकुंतला बहादुर - युएसए

अजय त्रिपाठी - इंग्लैंड

 

 

 

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिकपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

Google

 
 WWW http://www.srijangatha.com