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फूलों की पाठशाला
खुली पाठशाला फूलों की
पुस्तक-कॉपी
लिए हाथ में
फूल धूप की
बस में आए
कुर्ते में
जँचते गुलाब तो
टाई लटकाए
पलाश हैं,
चंपा चुस्त
पज़ामें में है -
हैट लगाए
अमलताश है ।
सूरजमुखी
मुखर है ज़्यादा
किंतु मोंगरा
अभी मौन है,
चपल चमेली है
स्लेक्स में
पहचानों तो
कौन-कौन है ।
गेंदा नज़र
नहीं आता है
जुही कहीं
छिपाकर बैठी है,
जाने किसने
छेड़ दिया है -
ग़ुलमोहर
ऐंठी-ऐंठी है ।
सबके अपने
अलग रंग हैं
सब हैं अपनी
गंध लुटाए,
फूल धूप की
बस में आए -
मुस्कानों के
बैग सजाए ।
डॉ. तारादत्त निर्विरोध
254, पद्मावती कॉलोनी, ए
अज़मेर रोड़,
जयपुर
राजस्थान
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302019
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