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।।सृजनगाथा।।
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वर्ष- 2, अंक - 17, अक्टूबर, 2007
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बचपन
नानाजी का चश्मा
नानाजी का चश्मा भैया
लगता सबको प्यारा
मुन्ना कहकर इसे वीडियो
देखे रोज नज़ारा ।
नानाजी जब पढ़ें किताबें
तब बंटी आ जाए
चश्में में चलचित्र देखना
उसको बहुत सुहाए ।
नानाजी के चश्मे को
गुड़िया कहती है टी.वी.
गुड़िया की यह बाँते सुनकर
हँसती है नानीजी ।
नानाजी तब कहने लगते
चश्मा करे करिश्मा
चाहे इसको कहो वीडियो
टी.वी. या सिनेमा ।
हरीश दुबे
स्टेट बैंक ऑफ इंदौर के पास
महेश्वर, जिला खरगौन, मध्यप्रदेश
451224
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हरीश दुबे -
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