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वर्ष- 2, अंक - 13, जून, 2007

अपनी बातकविताछंदललित निबंधकहानीलघुकथाव्यंग्यसंस्मरण थोपकथन भाषांतरसंस्कार मूल्याँकनहस्ताक्षर

पुस्तकायन विचार-वीथीप्रसंगवश इनदिनोंहिंदी-विश्व लोक-आलोकव्याकरणतकनीकबचपनशेष-विशेष हलचलविशेषांक सृजनधर्मीलेखकों से संपादक बनेंचतुर्दिकपुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

बचपन

 

हे भारत !

हे भारत! तू सबसे ऊपर, सदा रहा है, सदा रहेगा,

हे भारत! तू सबसे सुंदर, सदा रहा है, सदा रहेगा

हे भारत! तू धर्म का देश, सदा रहा है, सदा रहेगा,

हे भारत! तू कर्म का देश, सदा रहा है, सदा रहेगा

हे भारत! तू गुरूयों का देश, सदा रहा है, सदा रहेगा,

हे भारत! तू भक्तों का देश, सदा रहा है, सदा रहेगा

हे भारत! तू कर्णों का देश, सदा रहा है, सदा रहेगा,

हे भारत! तू श्रवणों का देश, सदा रहा है, सदा रहेगा

हे भारत! तू यतियों का देश, सदा रहा है, सदा रहेगा,

हे भारत! तू सतियों का देश, सदा रहा है, सदा रहेगा

हे भारत! तू शूरों का देश, सदा रहा है, सदा रहेगा,

हे भारत! तू हूरों का देश, सदा रहा है, सदा रहेगा

हे भारत! तू सबसे उन्नत, सदा रहा है, सदा रहेगा,

हे भारत! तू धरा की जन्नत, सदा रहा है, सदा रहेगा

हे भारत! तू जग की शान, सदा रहा है, सदा रहेगा,

हे भारत! तू सबसे महान, सदा रहा है, सदा रहेगा

हे भारत! तू ज्ञान का सागर, सदा रहा है, सदा रहेगा,

हे भारत! तू जग का मंदिर, सदा रहा है, सदा रहेगा

हे भारत! तू भक्ति का मार्ग, सदा रहा है, सदा रहेगा,

हे भारत! तू मुक्ति का मार्ग, सदा रहा है, सदा रहेगा

हे भारत! तू सबके मनमें, सदा रहा है, सदा रहेगा,

हे भारत! तू हर धडक़न में, सदा रहा है, सदा रहेगा

 

अशोक कुमार वशिष्ठ

103 chelveston crescent
Aldermoor, Southampton
SO16 5SD
Hampshire, ENGLAND.

 

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  संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

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