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वर्ष- 2, अंक - 14, जुलाई 2007

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   भाषांतर

 

 

प्यास, प्रतीक्षा और गति


शेख सईद

 

मछली सागर में है

और सागर मछली में

बीज वृक्ष में है

और वृक्ष बीज में

बूंद नदी में है

और नदी बूंद में

पर सागर, वृक्ष, नदी

दीख नहीं पड़ते -

मछली में, बीज में, बूंद में ।

क्योंकि वे भीतर हैं गहरे ।

अंधेरे में अभी ।

भीतर के अंधेरे में

यों कुछ सूझ नहीं पड़ता ।

सूझ पड़ता है सिर्फ -

मछली की प्यास में

बीज की प्रतीक्षा में

बूंद की गति में ।

सागर, वृक्ष नदी को

यदि पाना चाहो तो

प्यास, प्रतीक्षा और गति में जाओ

या अपने भीतर

प्यास, प्रतीक्षा, गति ले आओ ।

 

(उड़िया से अनुवादः बलदेव वंशी)

 

 

 शेख सईद

हाथी बंध साहि

ब्रह्मपुर, उड़ीसा

760001

 

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