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वर्ष- 2, अंक - 16, सितम्बर, 2007

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  लघुकथा

    

हाथी के दाँत

            स्कूल की सुबह की असेंबली में प्रिंसिपल सर ने पर्यावरण-प्रदूषण पर विस्तार से चर्चा की। प्रदूषण के कारणों पर चर्चा करते हुए उन्होंने ऐसे-ऐसे तथ्यों की जानकारी दी जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। पर्यावरण-प्रदूषण को रोकने के उपायों की भी उन्होंने विस्तार से जानकारी दी। पर्यावरण-प्रदूषण संबंधी उनके ज्ञान और उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को देखकर छात्रा ही नहीं अèयापक भी दंग रह गए। वक्तव्य की समाप्ति पर देर तक तालियां गूँजती रहीं।

 

            असेंबली के बाद प्रिंसिपल सर ने देखा कि पेड़ों के नीचे पतियों का अंबार लगा है। उन्होंने फौरन स्वीपर को बुलवाया और डाँटते हुए पूछा, ``यहाँ ये कूड़े का ढेर क्यों लगा है?´´ फिर जेब में से माचिस निकाल कर स्वीपर को देते हुए कहा, ``इन सभी पत्तियों  को कोने में इकट्ठी करके आग लगा दो। और आगे से स्कूल के किसी भी कोने में कोई पत्ती, कोई काग़ज का टुकड़ा नज़र नहीं आना चाहिए। कूड़े को इकट्ठा करने के बाद उसमें आग लगा दिया करो।´´

सीताराम गुप्ता

.ड़ी.106-सी, पीतमपुरा

दिल्ली-110034

 

 

 

 सीताराम गुप्ता की लघुकथाएँ

गिरेबान

लकीर

प्रतिद्वंद्वी

हाथी के दाँत

व्यस्तता

प्रगतिशीलता

अफ़सोस

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