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उड़ान
मैंने कहा था उस दिन मत जाओ अंधी-महत्वाकाक्षांओं के पीछे.... दुम हिलाते
घर से उखड़ा उखड़ जाता है ज़मीन से- उखड़ा-पौधा सूख जाता है
पर नहीं, तुम्हें तो सतरंगी सपने दीखते थे तारों में बस- तुम सपने सहेजते थे आज तुम खाली हाथ भिखारियों की तरह चाहत की भीख माँग रहे हो......।
जिन्हें बोने लाये थे इस भव्य धरती पर वह पनप गये है छल गये हैं-
पर हो गये है- इतने ऊँचे-कि तुम्हार हाथ नहीं पहुँचते-छूने को उन्हें ....और वे देख नहीं-पाते कहीं नीचे तुम्हें
246, Stratford Dr. Broadview Hts. Ohio 44147
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