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एक असंवैधानिक कविता
हमें चाहिए अपने हिस्से की स्वतंत्रता हमें चाहिए अपने हिस्से की समानता उससे पेशतर विश्व में मनुष्यता में कि हमें चाहिए अपने हिस्से का सुख हमें चाहिए अपने हिस्से का जीवन महाजीवन में मालूम है हमें कि भद्रजनों आदी नहीं हैं आप ऐसे सत्र से हाँ, कविता नहीं है हमारे संघर्ष का घोषणा-पत्र है यह
द्वारा जगदीश प्रसाद ए.बी.सी स्टैंडर्ड स्कूल पूरबटोला, बलरामपुर, उत्तरप्रदेश
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