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उसी को ढ़ूँढ़ना
क्यों मेरे सूने मस्तक पर स्नेह का टीका लगा कर चेतना की सुन्दरी को और बौना कर दिया । तुम मगर उड़ने लगे आकाश को छूने लगे मैं तड़पता रह गया अपनी धरा पर तुम निरखते ही गए मेरी विवशता मैं तुम्हे पहचान कर आवाज़ देना चाहता था पर विचारों ने मुझे आ कर सम्भाला औ तुम्हारी याद में उलझा रहा मोह, माया, तिमिर से घिरता रहा ज़िन्दगी का है यही किस्सा पुराना जो नहीं मिलना उसी को ढ़ूँढ़ना ।
21 Bideford Drive, Selly Oak Birmingham, B29 QG, U.K.
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