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अन्त में रोता है
इंसान छोटा या बड़ा इक साबुत मकान है जिसमें समाए हैं द्वार, खिड़की, छत विचारों की ईंटें पाँव तले धरती और दीवारें भी । मकान हो या घर मौसम के साये में वह तो बदलता नहीं । भटका इंसान पर पल-पल बदलता है लेकिन क्यों ? सोचा कब उसने ? अन्त में रोता है ।
21 Bideford Drive, Selly Oak Birmingham, B29 QG, U.K.
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