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साँप को रस्सी समझता जो रहा
बीज से वह वृक्ष बन अब सामने मेरे खड़ा है देखता हूँ वह बहुत मुझसे बड़ा है लोग सब अब दे बधाई कह रहे हैं वृक्ष के नीचे चलो छाया मिलेगी मानता हूँ सत्य ही सब कह रहे हैं जानता हूँ पर नियति पीछा करेगी पर कदाचित ज़िंदगी का सत्य तो कुछ और ही है दीप के नीचे अंधेरा ही अंधेरा मोह-भय का व्याकरण सबसे निराला साँप को रस्सी समझता जो रहा
21 Bideford Drive, Selly Oak Birmingham, B29 QG, U.K.
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