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उ *श्रद्धांजलि*
किस्मत हो तो ऐसी
राम कसम सरकार दुहाई पाँव बड़े हैं जूते छोटे ।
सोना स्थिर गल्ला मंदा और उछाला तिलहन में सिर जुलूस में फूटा था आँखें फूटी गरहन में हम भी किसी मुहूर्त में जन्मे सारे के सारे ग्रह खोटे ।
चूल्हें में आ गये तवे से किस्मत हो तो ऐसी किसे कहें किरकिरी आँख की किसको कहें हितैषी छत्तीस-तिरसठ तिरसठ-छत्तीस सब हैं बेपेंदी के लेटे ।
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