|
|
|
||||||||||
|
|
|||||||||||
|
|
||||||||||||
|
उ
क्यूँ डराती है ये हवा रईस अहमद 'फ़िगार'
अक्स मेरा न तू दिखा मुझको मेरी नज़रों से मत गिरा मुझको ।
मुझको रहने दे मेरे जैसा ही अपने जैसा न तू बना मुझको ।
एक सूखा हुआ शज़र हूँ मैं इतना ज़्यादा भी मत झुका मुझको ।
एक पैसा फकीर ने लेकर बख़्श दी ढेर सी दुआ मुझको ।
भूल जाऊँ न मैं उड़ान अपनी छोड़ कुछ देर तो खुला मुझको ।
टिमटिमाता चिराग़ हूँ मैं जब क्यूँ डराती है ये हवा मुझको ।
बेरुखी बेहिसी और ख़ुदग़र्जी शहर में आके ये मिला मुझको ।
मैं हूँ खुश्बू मुझे बिखरना है ऐ हवा दूर तक उड़ा मुझको ।
कैसे कर लूँ ज़मीर का सौदा रोकती है 'फ़िगार' अना मुझको ।
56, जवाहर कॉलोनी, बल्लूपुर रोड देहरादून, उत्तराखंड
|
|
|
||||||||||
|
|
||||||||||||
|
||||||||||||