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वर्ष- 2, अंक - 16, सितम्बर, 2007

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  छंद

 उ

 

धूँ-धूँ जलती बस्तियाँ


जितेन्द्र जौहर

 

मिली समूचे शहर को, दंगों की सौगात

खूँ से लथपथ दिन मिले, आँसू-भीगी रात ।

 

चाकू, खंजर गोलियाँ, पत्थर सबके पास

हरे रंग के होंठ पर, लाल-लाल-सी प्यास ।

 

मुल्ला बोला चीखकर, "काफ़िर है ये मार"

उग्र भीड़ ने पेट में, खंजर दिया उतार ।

 

चप्पे-चप्पे पर पुलिस, हथियारों से लैस

सन्नाटा लिखने लगी, पल में आँसू गैस ।

 

मुस्लिम ने 'अल्ला' कहा, हिन्दू बोला 'राम'

बस इतनी-सी बात पे, बातें बनीं तमाम ।

 

दंगों की पटु पटकथा, लिखता है क्यों - कौन

मालूम है सबको मगर, सब साधे हैं मौन ।

 

धूँ-धूँ जलती बस्तियाँ, दंगाई आज़ाद

यह सुनकर खुश हो गए, सत्ता के सय्याद ।

 

न वो मस्ज़िद का हुआ, न ये मंदिर-भक्त

दोनों को बस चाहिये, इक-दूजे का रक्त ।

 

ये कैसा कानून है, वाह, सियासत वाह

खेत गधेड़ी खा गए, पकड़े गए जुलाह

जितेन्द्र जौहर

एन-33/6, रेणुसागर

सोनभद्र, उत्तरप्रदेश - 241318

 

 

  छंदकार

गीत

- आनंदी सहाय शुक्ल

- ज्ञानेन्द्र साज

- अनिल अनवर

- रामदयाल

- डॉ. अजय पाठक

नवगीत

- डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र

- नईम

- ऋषिवंश

- विद्यानंदन राजीव

- इंदिरा मोहन

ग़ज़ल

- रईस अहमद 'फ़िगार'

- अग्निवेश शुक्ल

- तुली फकीरचंद जलंधरी

- सुल्तान अहमद

- विज्ञान व्रत

दोहे

- चंद्रसेन विराट

- आचार्य भगवत दुबे

- पुरुषोत्तम 'यक़ीन'

- प्रभु त्रिवेदी

- जितेन्द्र जौहर

माह के छंदकार

-- कैलाश गौतम

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