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पिता
पिता के जाने के बाद
बोलने लगा उनका चश्मा, छाता
इंक पेन, स्वेटर, कोट
यहाँ तक कि बोलते हुए लगने लगे
उनके जूते-चप्पल भी
पिता के हँसते-मुस्कराते
और यदा-कदा के अवसाद भरे चेहरे पर
हम जो कभी न पढ़ सके
उस थकान की एक-एक लकीर
अब साफ़ झलक रही है
फ्रेम जड़ी उनकी तस्वीर में
अपने मौन में
बहुत मुखर हो गये हैं पिता
क्रांति
203, टॉवर-3, साईनाथ स्क्वयेर
मदर्स स्कूल के पीछे, जलाराम
का रास्ता,
बडोदरा, गुजरात - 390021
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