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सृजनगाथा


 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-18, नवंबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। नवगीत ।।

 
 

संकट गहरा है

 

नई रोशनी से मुँह धो लें

लौट चलें

या आगे हो लें

 

पीछे सहज सहज क्षण ठहरे

आगे आगे साथी बहरे

पल छिन

चिंता चिंतन उभरे

किसको देखें, किससे बोलें

 

 

स्वीकारें क्या पिछले कल को

या अँकवारे अगले कल को

अपना

समझे किस सम्बल को

किसको टाले, किसे टटोलें

 

उधर विलम्बन, इधर त्वरा है

संकट का संकट गहरा है

विगत पंगु

आगत अँधेरा है

रचे बसे को सजा-सँजो लें

छविनाथ मिश्र

गवर्नमेंट क्वाटर 36 ए,

100 रवींद्र सरणी साहब बागान, लिलुवा

हावड़ा प.बं.-711203

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छांदस रचनाएं

गीत

डॉ.रामदरश मिश्र

नवगीत

छविनाथ मिश्र

डॉ. शिव बहादुर भदोरिया

डॉ. किशोर काबरा

ग़ज़ल

क्षय गोजा

सजीवन मंयक

दोहे

डॉ. रामनिवास मानव

 

 

 

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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