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सृजनगाथा
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वर्ष-2, अंक-18, नवंबर, 2007
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।। नवगीत ।।
संकट गहरा है
नई रोशनी से मुँह धो लें
लौट चलें
या आगे हो लें
पीछे सहज सहज क्षण ठहरे
आगे आगे साथी बहरे
पल छिन
चिंता चिंतन उभरे
किसको देखें, किससे बोलें
स्वीकारें क्या पिछले कल को
या अँकवारे अगले कल को
अपना
समझे किस सम्बल को
किसको टाले, किसे टटोलें
उधर विलम्बन, इधर त्वरा है
संकट का संकट गहरा है
विगत पंगु
आगत अँधेरा है
रचे बसे को सजा-सँजो लें
छविनाथ मिश्र
गवर्नमेंट क्वाटर 36 ए,
100 रवींद्र सरणी साहब बागान, लिलुवा
हावड़ा प.बं.-711203
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छांदस रचनाएं
गीत
डॉ.रामदरश मिश्र
नवगीत
डॉ. शिव बहादुर भदोरिया
डॉ. किशोर काबरा
ग़ज़ल
अक्षय गोजा
सजीवन मंयक
दोहे
डॉ. रामनिवास ‘मानव’
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