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सृजनगाथा
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वागर्थ प्रतिपत्तये
वर्ष-2, अंक-18, नवंबर, 2007
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।। भाषांतर ।।
बारिश आयी (मराठी कविता)
बारिश आयी बारिश आयी पडते हैं ओले जंगल में अटके है मवेशी आओ अब भोले मेघों के पर्वत गिरते हैं बजती खाई क्यूँ गाँव बेचारा बह जायेगा बाढ़ लगाई क्यूँ ठहर ज़रा तो दिल में प्रभो नभ में कहाँ छिपे हो लाऊँ किनारे जरा बाढ में छिपी नौकाओं को गाँव में कोई नही बावला फिरता रहता है जो कहीं ना कोई भुजंग शापित वंश तोड़ता है जो यहाँ किसी ने रचा था कोई रिमझिम बारिश गाना आते जाते यहाँ डालता वो चिडिया को दाना
ग्रेस
अनुवाद- तुषार जोशी
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कवि
ग्रेस (मराठी)
रोबर्तो हुआरोज़ (अर्जेंटीना)
फ़रूग फ़रूखजाद (ईरान)
कुसुमाग्रज (मराठी)
संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ।बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ।सुधीर शर्मा, डॉ।जे।आर।सोनी, कामिनी, प्रगति
तकनीकः प्रशांत रथ