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भाग-6
एक नये समीक्षक को
सलाह
जार्ज बर्नार्ड शॉ
(उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक में गोल्डिंग ब्राइट नामक एक युवक
नाट्य समीक्षा
से संबंधित सिद्धांत के विनियोग की व्यावहारिक शिक्षा
प्राप्त करने के उद्देश्य से अँगरेज़ी भाषा के विश्वविख्यात नाटककार
जार्ज बर्नार्ड शॉ के समक्ष पत्रों के माध्यम से उपस्थित हुए । शॉ ने
उनके मनोबल को ऊँचा किया । शॉ को भी ब्राइट की बालसुलभ भावुकता और
उत्कंठा ने प्रभावित किया । गोल्डिंग को दी गई सलाहें बाद में
'ऐडवाइस टु ए यंग
क्रिटिक'
नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुईं । इस पुस्तक का संपादन डॉक्टर
ई.जे.वेस्ट ने किया है । इस कृति की भूमिका उन्होंने 5 सितम्बर 1955 को
लिखा थी । 14 वर्ष पूर्व पटना में ए.एन.कॉलेज हिंदी विभाग की अध्यक्षा
डॉ. सरोज सिन्हा ने इसका अनुवाद किया और अनुदित कृति का नाम दिय़ा -
एक नये समीक्षक को सलाह
। हम इसे साहित्यिक हित में संपूर्णतः प्रकाशित
कर रहे हैं। इस महान कृति को अब
धारावाहिक रूप से आगे पढ़ सकते हैं । प्रस्तुत है इस धारावाहिक की
छठवीं कड़ी - संपादक)
29 फिट्ज्राय स्क्वायर, डब्ल्यू
11 जनवरी, 1885
प्रिय महोदय,
स्तम्भ-लेखन का एक बहुत ही बुरा पक्ष भी है। इसमें आपको बहुत
ही ज़्यादा लोगों से सम्पर्क रखना पड़ता है। साथ ही, इसमें और
लोगों की वैयक्तिक नापसन्द और झगड़ों का इतना सामना करना पड़ता
है कि सम्भव है आप उखाड़ फेकें जाएँ, हालाँकि आप सर्वथा
निर्दोष ही हों । उदाहरण के लिए
‘द
सटरडे’
के संगीत समीक्षक रशीमैन को लिया जा सकता है। वर्त्तमान
सम्पादक-जगत् के सम्भवतः वे सर्वोत्तम समीक्षक हैं। कभी वे
‘द
सन’
के लिए भी लिखा करते थे, लेकिन उन लोगों न उन्हें पदमुक्त कर
दिया। वे अच्छे आदमी थे और उनके ईर्ष्यालु शत्रुओं की संख्या
अधिक हो गयी थी। यह स्वाभाविक भी है। यही बात फ्रैक हैरिस के
साथ हुई और यही हाल मेरा हुआ। लंदन के समाचार पत्र कार्यालय
में हम तीनों के विपक्ष में बातें होती ही रहती हैं। समभ्वतः
आपने भी देखा होगा कि
‘स्टार’
की चुनौती को मैंने कैसे निभाया, हालाँकि मुझे नहीं मालूम कि
उस स्तम्भ का लेखक कौन था। फेटर लेन के समीपस्थ फ्लिट स्ट्रीट
स्थित वल्डर्स प्रेस द्वारा प्रकाशित सेल्ल डिक्शनरी आप ख़रीद
लें । इसके लिए कुछ शिलिंग लगेंगे । अनुमानतः तीन शिलिंग से
अधिक नहीं । इस सावधानी-पूर्वक पढ़ें । स्तम्भ-लेखन को विविधता
प्रदान करने में इसका ज्ञान बड़ा सहायक होगा और फिर स्तम्भ-लेख
देश के कई अख़बारों में एक साथ भेजें!
इस प्रकार की पत्रकारिता का मुझे यथेष्ट अनुभव नहीं है। इसलिए
विस्तार से इस विषय में मैं सलाह न दे सकूँगा। हाँ, इतना ज़रूर
लगता है कि किसी भी उद्यमी लेखक को यह सब करना चाहिए। अगर आप
अपने पिता जी को एक ‘रेर्मिगटन’
या ‘नॉर्थ’
टाइपराइटर खरीदने के लिए राजी कर सकें (विवध पत्रों में प्रेषण
के लिए एक उद्यमी व्यक्ति को इसे अवश्य रखना चाहिए) तो आप एक
साथ कार्वन पेपर के द्वारा कम से कम दस प्रतियाँ निकाल सकते
हैं।
किसी भी नव-लेखक के लिए, जो अपने कार्यालय में अद्यतन बना रहना
चाहता है, टाइपराइटर आवश्यक है। टंकित प्रतियों को दस विभिन्न
जिलों के दस विभिन्न पत्रों में एक साथ भेज सकते हैं। बहुत
सम्भावना है कि उनमें से दो या तीन स्थान पा जाएँ। आप स्वल्प
पारिश्रमिक पर थियेटर के गल्प तथा समाचार के लेखन का प्रस्ताव
एक साप्ताहिक पत्र से कर सकते हैं। उन्हें बताइए कि दस-पन्द्रह
शिलिंग में लिखने को आप तैयार हैं। इस कॉलम को ऐसे कई अखबारों
में एक साथ भेजें, जिनका वितरण एक व्यवस्थापक द्वारा नहीं होता
तथा जिनके मुद्रण की तिथि एक हो । एक साथ एक से अधिक अखबारों
में छपवा कर आप पारिश्रमिक ले सकते हैं। लेकिन, सावधान रहें कि
अखबारों के मालिक जिसके सामने आप प्रस्ताव रखते हैं,
भिन्न-भिन्न व्यक्ति हों। बात यह है कि कुछ प्रांतीय अख़बार
ऐसे भी हैं जो राज्य के सुदूर हिस्सों में वितरित कई पत्रों की
प्रतिलिपि होते हैं, किन्तु नाम कुछ दूसरा होता है । अगर आपको
सफलता न मिली तो भी प्रेस के बारे में आपको बहुत कुछ ज्ञान तो
हो ही जाएगा और आप जाने जाएँगे कि इस तरह से उपार्जन करने
वालों से कैसे प्रश्न पूछे जाने चाहिए। किसी चीज़ को ग़लत रूप
में करके भी यह जाना जा सकता है कि इसके करने का उचित रास्ता
क्या था। उचित काम करने के प्रयास के आरम्भ का यह महत्वपूर्म
कदम है।
‘सटर्डे’
में छपे मेरे लेख पर आपकी समालोचनात्मक सराहना के लिए मैं आपका
बड़ा आभारी हूँ। ग्रुण्डी के नाटक के विषय में मेरे विचार की
अपेक्षा आपके विचार अधिक न्यायसंगत हैं, क्योंकि आपने उसके
महत्व भी पर प्रकाश डाला है जबकि मैं नाटक के विकास की ग़लत
दिशा का विरोध करता रहा हूँ। अभी भी मैं उस दिशा को ग़लत ही
मानता हूँ। नाटक की व्याख्या करने के लिए एक तार्किक
व्याख्याता की आवश्यकता होती है। ड्यूमाज़ फिल्स के
‘थुवेनिन’
को मैं बुहत नापसन्द करता हूँ। निष्कर्ष के सम्बध में आपने जो
साहस दिखलाया, उसे दो कारणों से मैंने छोड़ दिय। पहला यह कि यह
पतली लाल रेखा पर वह एक घटिया बकवास है, जिसकी कल्पना आप ही कर
सकते हैं। ‘आर्म्स
ऐण्ड द मैन’
के लेखक को यह बहुत साहसपूर्ण नहीं लगा। दूसरा इस निष्कर्ष का
कि दुखद विवादों की कठिनाई का कोई समाधान नहीं है, सीधा समाधान
तो है कि तलाक के नियमों को सुधारा जाए। कुछ अमेरिकी राज्यों
में, उदाहरण के लिए दक्षिण डकोटा में तो चार आदमी ही आसानी से
सब कुछ सुलझा लेते हैं। यह मंच का एक विशेष गुण है। मंच पर
नाटक देखने वाले लोगों का जीवन वास्तविक जीवन से भिन्न होता
है। नाटक- कार हमेशा ऐसे रहस्यमय प्रश्न उठाते हैं जिनका उत्तर
प्रत्येक व्यावहारिक आदमी जानता है। नाटककार वास्तविक जीवन की
वैसी स्थितियों को जो भयंकर कठिनाइयाँ पैदा करती हैं, बहुत
हल्के ढंग से छोड़ देता है। अभिनय के सम्बंध में बेचारे बैण्डन
थामस ने असम्भाव्य भूमिका अदा करने के लिए भरपूर प्रयास किया ।
दूसरी रात मैंने नाटक को देखा।
‘कैलहाउन’
अपने अभिनय में एक हद तक बुरी नही थीं, यह सच है कि एक दृश्य
में वे उतना अच्छा नहीं कर पायीं जितना वे कर सकती थीं।
वस्तुतः वही दृश्य नाटक का मूल है और यही नाटक के अस्तित्व का
औचित्य सिद्ध करता है।
गिल्वर्ट हेयर को घृणा से परे समझ कर आप उनकी उपेक्षा न करें।
मान लें कि आपके पिता जी ने
‘द
वर्ल्ड’
का स्वामित्व खरीद लिया और आपको उन्होंने मंचीय स्तम्भ लिखने
को दिया तो निश्चय ही उन पाठकों को जो आर्चर के लेखन से बहुत
प्रभावित लिखें और प्राणोपम काम करें तो सभी अच्छे आदमी जो इस
पत्र के छापेखाने में काम करते हैं, यह मान लेंगे कि आपका
प्रयास सफल था। यदि आप अभी से बीस वर्ष वाद श्रेष्ठ अभिनय का
आनन्द लेना चाहते हैं तो अभी नौसिखुए और लेख छपाने के लिए
भटकने वाले लोगों के साथ आपको बहुत अच्छा सम्बंध बनाये रखना
चाहिए।
अब मै शायद ही ‘सटरडे’
में छपे अपने लेख को फिर से छपवाऊँगा।
‘वर्ल्ड’
में छपे लेखों को भी अलग से छपवाने के प्रस्ताव पर मैं सहमत
नहीं हूँ। जिस सप्ताह में लिखा गया, उस सप्ताह में उसका एक
परिवेश था। सप्ताह बीत जाने पर उसकी आधी नवीनता तो वैले भी
समाप्त हो गयी है।
(क्रमशः अगले अंकों में )
जी.बी. एस.
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