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सृजनगाथा


 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-19, दिसंबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

मूल्याँकन हस्ताक्षर पुस्तकायन विचार-वीथी प्रसंगवश इनदिनों हिंदी-विश्व लोक-आलोक व्याकरण तकनीक

बचपन शेष-विशेष हलचल विशेषांक सृजनधर्मी लेखकों से संपादक बनें चतुर्दिक पुरातनअंकअभिमतमुख्यपृष्ठ

 

।। कविता ।।

 

 

यादों के जुगनू

  

चमचम चमके

गहन अंधियारे में

लाख भागूँ

इनके पीछे।

 

ऑंचल फैलाऊँ

पलके बिछाऊँ

निकल भागे ये गिरफ़्त से

 

मैं हारी

जीते ये

यादों के जुगनू।

 

  विपिन चौधरी

मकान नः १००८

हाउसिंग बोड कलोनी, सेक्टर १५ ,
हिसार, हरियाणा - १२५००१

 ◙◙◙

कविताएँ

त्रिलोचन

नीलाभ

कुमार अंबुज

विश्वरंजन

प्रो.भागवत प्रसाद 'नियाज'

सीमा सोनी

- पहाड़ों पर बारिश

- आज की रात

- तोता सीख गया है...

- छुई-मुई

- सज़ा

विपिन चौधऱी

- कभी दूर कभी पास

- सादृश्य

- इस चक्रव्यूह में

- समय और मैं

- यादों के जुगनू

 

 

 

 

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संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति

तकनीकः प्रशांत रथ

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