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सृजनगाथा
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वागर्थ प्रतिपत्तये
वर्ष-2, अंक-19, दिसंबर, 2007
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।। कविता ।।
यादों के जुगनू
चमचम चमके
गहन अंधियारे में
लाख भागूँ
इनके पीछे।
ऑंचल फैलाऊँ
पलके बिछाऊँ
निकल भागे ये गिरफ़्त से
मैं हारी
जीते ये
यादों के जुगनू।
विपिन चौधरी
मकान नः १००८
हाउसिंग बोड कलोनी, सेक्टर १५ ए, हिसार, हरियाणा - १२५००१
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ककविताएँ
त्रिलोचन
नीलाभ
कुमार अंबुज
विश्वरंजन
प्रो.भागवत प्रसाद 'नियाज'
सीमा सोनी
- पहाड़ों पर बारिश
- आज की रात
- तोता सीख गया है...
- छुई-मुई
- सज़ा
विपिन चौधऱी
- कभी दूर कभी पास
- सादृश्य
- इस चक्रव्यूह में
- समय और मैं
- यादों के जुगनू
संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति
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