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सृजनगाथा
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वर्ष-2, अंक-19, दिसंबर, 2007
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।। कविता ।।
छुई-मुई
शहर में अब नहीं उगते
छुई-मुई के पौधे
क्योंकि हो गए हैं
शहर के सारे लोग
बेशर्म
मुझे नहीं मालूम
कहाँ चली गई
शहर से शर्म
और छुई-मुई के पौधे
सीमा सोनी
27/622, इंदिरा भवन, न्यू शांति नगर
रायपुर, छत्तीसगढ़, 492007
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ककविताएँ
त्रिलोचन
नीलाभ
कुमार अंबुज
विश्वरंजन
प्रो.भागवत प्रसाद 'नियाज'
- पहाड़ों पर बारिश
- आज की रात
- तोता सीख गया है...
- छुई-मुई
- सज़ा
संपादकः जयप्रकाश मानस संपादक मंडलः डॉ.बलदेव,गिरीश पंकज, संतोष रंजन, राम पटवा, डॉ.सुधीर शर्मा, डॉ.जे.आर.सोनी, कामिनी, प्रगति
तकनीकः प्रशांत रथ