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सृजनगाथा


 

 ई-पताः srijangatha@gmail.com

वागर्थ प्रतिपत्तये

वर्ष-2, अंक-19, दिसंबर, 2007

अपनी बात कविता छंद ललित निबंध कहानी लघुकथा व्यंग्य संस्मरण थोपकथन भाषांतर संस्कार

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।। कविता ।।

 

 

तोता सीख गया है हवेलियों की जुबान

हवेली ने

उस उड़ते हुए

तोते को कैद कर लिया है

या तोते ने

हवेली की उड़ान को

शहर में सन्नाटा छा जाता है

तोते की बोली से

तोता सीख गया है

हवेलियों की जुबान

जलायी गई औरत की चीख

उस पर बरसाये गए

कोड़ों की आवाज़

तोता यदा-कदा रटने लगता है

कब की मर चुकी

ज़िंदा जलती

उस औरत की चीख-पुकार

और लोग दौड़ पड़ते हैं

उस हवेली की ओर

कि फिर कहीं

कोई औरत.......

  सीमा सोनी

27/622, इंदिरा भवन, न्यू शांति नगर

रायपुर, छत्तीसगढ़, 492007

 ◙◙◙

 

कविताएँ

त्रिलोचन

नीलाभ

कुमार अंबुज

विश्वरंजन

प्रो.भागवत प्रसाद 'नियाज'

सीमा सोनी

- पहाड़ों पर बारिश

- आज की रात

- तोता सीख गया है...

- छुई-मुई

- सज़ा

 

 

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