कहानी मुल्ला नसरुद्दीन की
मौत की सजा
मुकेश नादान
आज फिर अमीर की अदालत लगी। हथकड़ियों और बेड़ियों से जकड़ा जब मुल्ला नसरुद्दीन दरबार में लाया गया तो शर्म के मारे दरबारियों की नज़रें जुक गईं। उसे देखकर आलिम भवें चढ़ाकर अपनी दाढ़ियाँ सहलाने लगे। वे एक-दूसरे से नज़रें भी नहीं मिला पा रहे थे । अमीर भी सकपका कर दूसरी ओर दरबार में हाजिर थे। बागदाद के मौलाना हुसैन भी दरबार में हाजिर थे।
अमीरे आजम में बहुत लंबी कार्यवाही न करके मुल्ला नसरुद्दीन को फौरन ही मुत्युदंड की सजा सुना दी। अब यह तय होना था कि मुल्ला नसरुद्दीन को मौत की सजा किस प्रकार दी जाए।
सबसे पहले अर्सला बेग ने अपनी राय पेश की- ‘माबदौलत ! इसे सूली पर चढ़ा दिया जाए, ताकि लोग इसी दर्दनाक मौत को अपनी आँखों से देख सकें।’
नगीं तुर्की के सुलतान ने इसे यही सजा दी थी, मगर यह नामुराद जिंदा बच गया।
बख्तियार ने कहा- ‘अमीर आजम ! इस काफिर का सिर कलम कर देना चाहिए।’
‘नहीं ! यहा भी कोई कारगर तरीका नहीं है।’ अमीर ने बुरा-सा मुँह बनाया- क्योंकि बगदाद के खलीफा ने एक बार ऐसा ही किया था, लेकिन यह शैतान वहाँ से भी साफ-साफ बच गया।
इस प्रकार एक के बाद एक दरबारी अपनी-अपनी राय पेश करते रहे, मगर अमीर को किसी की भी राय न जँची।
सबसे अंत में बगदाद के आलिम मौलाना हुसैन ने अपना मत प्रस्तुत किया- ‘अमीर आजम ! मौत का एक तरीका बाकी है जो आज तक किसी ने नहीं आजमाया। वह है- ‘पानी में डुबोकर किसी को मारना । मैंने अपने इल्म से पता लगाया है कि बुखारा में एक पाक तालाब है जो कि शेख तुरखान के तालाब के नाम से मशहूर है। गंदी ताकतें ऐसे पाक तालाब के पास भी नहीं फटकती । इस मुजरिम की यदि काफी समय तक पानी में डुबाया जाए, तो यकीनन इसकी मौत हो जाएगी।’
‘वाकई !’ अमीर के चेहरे पर खुशी के भाव दिखाई दिए - ‘यकीनन ये राय काबिले तारीफ है। इस पर फौरन अमल किया जाए.।’ और फिर प्रधानमंत्री सहित सभी दरबारियों ने तय किया कि मुल्ला नसरुद्दीन को चमड़े के थैले में बंद कर तालाब में काफी देर तक डुबोए रखा जाए। इस प्रकार वह यकीनन मर जाएगा। तय हुआ कि सूर्योदय के बाद उसे एक थैले में बंद कर ले जाया जाएगा। साथ ही चार थैले चिथड़ों से भरे भी ले जाएँगे ताकि असली मुल्ला नसरुद्दीन किस थैले में हैं, किसी को पता ही न चले। खाली बोरे आम रास्ते से तथा असली बोरा सुनसान रास्ते से ले जाया जाएगा ताकि लोगों को किसी प्रकार का हंगामा करने का मौका न मिले।
मुकेश
नादान
दिल्ली
